Chintan Quotes


धैर्य का मंत्र उनके लिए लाभदायक है, जिनके कार्यों में विघ्न- बाधाएँ उपस्थित होती हैं और वे निराश होकर अपने विचार को ही बदल डालते हैं। यह निराशा तो मनुष्य के लिए मृत्यु के समान है। इससे जीवन की धारा का...View More
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कठिनाइयों को उनसे दूर भाग कर, घबराकर दूर नहीं किया जा सकता। उनका खुलकर सामना करना ही बचने का सरल रास्ता है। प्रसन्नता के साथ कठिनाइयों का वरण करना आंतरिक मानसिक शक्तियों के विकसित होने का राजमार्ग है। संसार के अधिकांश महापुरुषों...View More
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कर्मफल और ईश्वर


हमें क्या अधिकार है कि पीड़ितों से इसलिए घृणा करें कि उनने कभी कोई भूल की होगी, जिसका दण्ड उन्हें मिल रहा है। हमें तो इतना ही सोचना चाहिए कि पीड़ितों के रूप में ईश्वर हमारी परीक्षा के लिए सामने आया...View More
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मानवीय गरिमा


जो लोग सुखी हैं, सन्मार्गगामी और सदाचारी हैं, उन्हें किसी की सेवा की क्या जरूरत पड़ेगी? सहायता करने का पुण्य- परमार्थ तो आप उन्हीं व्यक्तियों के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं, जो पिछड़े हैं, दुःखी या पीड़ित हैं। वे अपने आपके लिए...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


अपने कार्यों में भूलें हो जाना, असफलताएँ मिलना, कठिनाइयाँ आना एक स्वाभाविक बात है। कई लोग इसके बारे में सोच- विचार में इतने खो जाते हैं कि सारा शक्ति प्रवाह उसी केन्द्र पर लग जाता है। अन्य कार्यों का ध्यान ही नहीं रहता।...View More
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मानवीय गरिमा


जो लोग प्रत्यक्ष में पुण्यात्मा दिखाई देते हैं, वे भी बड़ी- बड़ी विपत्तियों में फँसते देखे गये हैं। सतयुग में भी विपत्ति के अवसर आते रहते थे। यह कौन जानता है कि किस मनुष्य पर किस समय कौन विपत्ति आ पड़े। इसलिए दूसरों...View More
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सफल सार्थक जीवन


साधना एक पराक्रम है, संघर्ष है, जो अपनी ही दुष्प्रवृत्तियों से करना होता है।
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स्वाध्याय और सदविचार


विचारों का परिष्कार एवं प्रसार करके आप मनुष्य से महामनुष्य, दिव्य मनुष्य और यहाँ तक ईश्वरत्व तक प्राप्त कर सकते हैं। इस उपलब्धि में आड़े आने के लिए कोई अवरोध संसार में नहीं। यदि कोई अवरोध हो सकता है, तो वह...View More
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धर्म और विज्ञान


धर्म अफीम की गोली नहीं है। परस्पर विद्वेष और असहिष्णुता उत्पन्न करने वाली कट्टरता को साम्प्रदायिक कहा जा सकता है, पर जिसका एकमात्र उद्देश्य ही प्रेम, दया, करुणा, सेवा, उदारता, संयम एवं सद्भावना को बढ़ाना है, उस धर्म को न तो अनावश्यक कहा जा...View More
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सफल सार्थक जीवन


सच्ची प्रगति झूठे आधार अपनाने से उपलब्ध नहीं हो सकती। स्थायी सफलता और स्थिर समृद्धि के लिए उत्कृष्ट मानवीय गुणों का परिचय देना पड़ता है। जो इस कसौटी पर कसे जाने से बचना चाहते हैं, जो जैसे बने तुरन्त- तत्काल बहुत कुछ...View More
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कर्मफल और ईश्वर


पाप कर्मों के लिए अपना अंतःकरण जिसे धिक्कारता और प्रताड़ित करता रहता है, वह मनुष्य सोते- जागते कभी चैन नहीं पा सकता। दमा और दर्द के रोगी की भाँति पापी को भी न रात में, न दिन में कभी भी चैन नहीं...View More
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प्रेरक विचार


बड़े- बड़े उपदेश, व्याख्यान, भाषण आदि का समाज पर प्रभाव अवश्य पड़ता है, किन्तु वह क्षणिक होता है। किसी भी भावी क्रान्ति, सुधार, रचनात्मक कार्यक्रम के लिए प्रारंभ में विचार ही देने पड़ते हैं, किन्तु सक्रियता और व्यवहार का संस्पर्श पाये बिना उनका...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


किसी व्यक्ति की उपासना सच्ची है या झूठी, उसकी एक ही परीक्षा है कि साधक की अन्तरात्मा में संतोष, प्रफुल्लता, आशा, विश्वास और सद्भावना का कितनी मात्रा में अवतरण हुआ? यदि यह गुण नहीं आये हैं और हीन वृत्तियाँ उसे घेरे हुए हैं,...View More
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समाज निर्माण


समाज के कल्याण की बड़ी- बड़ी बातें होती हैं, किन्तु अपने जीवन के बारे में कभी कुछ सोचा है हमने? जिन बातों को भाषण, उपदेश, लेखों में हम व्यक्त करते हैं, क्या उन्हें कभी अपने अंतर में देखा है! क्या उन आदर्शों...View More
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प्रेरक विचार


भाग्य और कुछ नहीं, कल के लिए हुए पुरुषार्थ का आज का परिपक्व स्वरूप ही भाग्य है। जो आज भाग्यवान दीखते हैं, उन्हें वह सौभाग्य अनायास ही नहीं मिला है। विधाता ने कोई पक्षपात भी उनके साथ नहीं किया है। उनके पूर्व...View More
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स्वाध्याय और सदविचार


निर्भयता उत्कृष्ट मानसिक स्थिति का परिणाम है। यह एक नैतिक सद्गुण है, जो बड़े तप और त्याग से प्राप्त होता है। मन का जितना विकास होता जाएगा, उसी अनुपात से निर्भयता की उपलब्धि होगी। उत्कृष्ट आदर्श- सिद्धान्तों की रक्षा के लिए जितना उत्सर्ग,...View More
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कर्मफल और ईश्वर


अनेक लोग जरा- सा संकट आते ही बुरी तरह घबरा जाते हैं। हाय- हाय करने लगते हैं, उसे ईश्वर का प्रकोप मानकर भला- बुरा कहने लगते हैं। निराश- हतोत्साह होकर ईश्वर के प्रति अनास्थावान् होने लगते हैं- यह ठीक नहीं। आपत्तियाँ संसार में सहज...View More
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प्रेरक विचार


भाग्यवादी वह है, जो स्वयं अपने में विश्वास नहीं करता। वह सदा दूसरों की सलाह का ही मुहताज बना रहता है। जैसा उचित- अनुचित दूसरे लोग सुझा देते हैं, वह वैसा ही मान बैठता है। अपनी मौलिकता और अपने विवेक को वह काम...View More
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स्वाध्याय और सदविचार


नम्रता एक प्रबल पुरुषार्थ है जिसमें सबके हित के लिए अन्यायी को मिटाने की नहीं, वरन् उसके अत्याचार को सहन करके उसे सुधारने का ठोस विज्ञान है। यह भूल सुधार का एक साधन है, जिसमें दूसरों को कष्ट न देकर स्वयं...View More
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जीवन की सर्वोपरि सफलता इसी बात में है कि मनुष्य अपने लिए सम्माननीय स्थिति प्राप्त करे। संसार से धनी, निर्बल, विद्वान्, मूर्ख, बलवान् सभी को एक दिन जाना पड़ता है। वह जो कुछ धन, दौलत, वैभव- विभूति, सुख- दुःख उपार्जित करता है, सब यहीं इसी...View More
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कर्मफल और ईश्वर


यदि तुम भलाई का अनुकरण करके कष्ट सहन करो तो कुछ समय पश्चात् कष्ट तो चला जाता है, पर भलाई बनी रहती है। पर यदि तुम बुराई का अनुकरण करके सुखोपभोग करो तो समय आने पर सुख तो चला जायेगा...View More
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सफल सार्थक जीवन


ऊँचा उठना ही मनुष्य जीवन की सफलता का चिह्न है। मन को निग्रहीत, बुद्धि को परिष्कृत, चित्त को उदात्त और अहंकार को निर्मल बनाकर इसी शरीर में दिव्य शक्तियों का अवतरण किया जा सकता है और उन विभूतियों से लाभान्वित हुआ...View More
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मानवीय गरिमा


अनावश्यक दुर्भावनाओं को मन में स्थान देना, दूसरों के लिए अशुभ सोचते रहना, औरों के लिए उतना हानिकारक नहीं होता, जितना अपने लिए। उचित यही है कि हम सद्भाव संपन्न रहें। जिनमें वस्तुतः दोष- दुर्गुण हों उन्हें चारित्रिक रुग्णता से ग्रसित समझकर सुधार...View More
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संघर्ष का ही दूसरा नाम जीवन है। जहाँ सक्रियता समाप्त हुई वहाँ जीवन का अंत समीप समझिए। आलसी, अकर्मण्यों को जीवित अवस्था में भी मृत की संज्ञा दी जाती है। जिसने पुरुषार्थ के प्रति अनास्था व्यक्त की वह जीवन के प्रति आस्था...View More
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मानसिक अशान्ति एक ऐसा आंतरिक आंदोलन है, जिसके उठने से मनुष्य का विवेक, विचार एवं ज्ञान नष्ट हो जाता है। उसकी बुद्धि असंतुलित हो जाती है, जिसके फलस्वरूप वह अशान्ति के कारणों का निराकरण कर सकने में सर्वथा असमर्थ रहता है...View More
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उन्नति के लिए चाहे कितने ही व्यक्ति सहानुभूति व्यक्त क्यों न करें, पर यह निर्विवाद है कि हमारा इससे कुछ काम न चलेगा। हमें अपनी स्थिति स्वयं सुधारनी होगी। स्वयं कठिनाइयों से लड़कर नया निर्माण करना पड़ेगा। विशृंखलित शक्तियों को जुटाकर...View More
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यह ध्रुव सत्य है कि चाहे कितना ही छिपाकर, अँधेरे में, दीवारों के घेरे के भीतर या चिकनी- चुपड़ी लपेटकर झूठ बोला जाय, झूठा व्यवहार किया जाय, किन्तु वह एक न एक दिन अवश्य प्रकट होकर रहता ही है और एक न एक...View More
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आज किसी भी बात के लिए जमाने को जिम्मेदार ठहरा देने का एक रिवाज सा चल पड़ा है। जमाने को दोष दिया और छुट्टी पाई, किन्तु यह सोचने- समझने का जरा भी कष्ट नहीं किया जाता कि आखिर किसी जमाने का स्वरूप...View More
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देवत्व हमारी आवश्यकता है। दुष्प्रवृत्तियों से भय लगता है। पवित्रता हमें प्रिय है। अपवित्रता से दुःख मिलता है। निश्छलता से सुख मिलता है। छल और कपट के कारण जो संकीर्ण स्वभाव बनता है, उससे अपमान मिलता है। जो कुछ भी श्रेष्ठ है, सार्थक है, वही...View More
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भविष्य की आशंकाओं से चिंतित और आतंकित कभी नहीं होना चाहिए। आज की अपेक्षा कल और भी अच्छी परिस्थितियों की आशा करना यही वह सम्बल है, जिसके आधार पर प्रगति के पथ पर मनुष्य सीधा चलता रह सकता है। जो निराश हो...View More
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