Chintan Quotes

आध्यात्मिक चिंतन धारा


गिरे हुओं को उठाना, पिछड़े हुओं को आगे बढ़ाना, भूले को राह बताना और जो अशान्त हो रहा है उसे शान्तिदायक स्थान पर पहुँचा देना यह वस्तुतः ईश्वर की सेवा ही है। जब हम दुःख और दरिद्र को देखकर व्यथित होते View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


सकाम उपासना से लाभ नहीं होता ऐसी बात नहीं है। जब सभी को मजदूरी मिलती है, तो भगवान् किसी भजन करने वाले की मजदूरी क्यों न देंगे? जितना हमारा भजन होगा, जिस श्रेणी की हमारी श्रद्धा होगी एवं जैसा भाव होगा, उसके...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


हम पृथकतावादी न बनें। व्यक्तिगत बड़प्पन के फेर में न पड़ें। अपनी अलग से प्रतिभा चमकाने का झंझट मोल न लें। समूह के अंग बनकर रहें। सबकी उन्नति में अपनी उन्नति देखें और सबके सुख में अपना सुख खोजें। यह मानकर चलें...View More
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समाज निर्माण


हम पृथकतावादी न बनें। व्यक्तिगत बड़प्पन के फेर में न पड़ें। अपनी अलग से प्रतिभा चमकाने का झंझट मोल न लें। समूह के अंग बनकर रहें। सबकी उन्नति में अपनी उन्नति देखें और सबके सुख में अपना सुख खोजें। यह मानकर चलें...View More
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युग निर्माण योजना


हम पृथकतावादी न बनें। व्यक्तिगत बड़प्पन के फेर में न पड़ें। अपनी अलग से प्रतिभा चमकाने का झंझट मोल न लें। समूह के अंग बनकर रहें। सबकी उन्नति में अपनी उन्नति देखें और सबके सुख में अपना सुख खोजें। यह मानकर चलें...View More
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मानवीय गरिमा


मेरे कारण दूसरों का भला हुआ- यह सोचना मूर्खता है। हमारे बिना संसार का कोई काम अटका न रहेगा। हमारे पैदा होने से पहले संसार का सब काम ठीक ठीक चल रहा था और हमारे बाद भी वैसा चलता रहेगा। परमात्मा उतना...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


मेरे कारण दूसरों का भला हुआ- यह सोचना मूर्खता है। हमारे बिना संसार का कोई काम अटका न रहेगा। हमारे पैदा होने से पहले संसार का सब काम ठीक ठीक चल रहा था और हमारे बाद भी वैसा चलता रहेगा। परमात्मा उतना...View More
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समाज निर्माण


मेरे कारण दूसरों का भला हुआ- यह सोचना मूर्खता है। हमारे बिना संसार का कोई काम अटका न रहेगा। हमारे पैदा होने से पहले संसार का सब काम ठीक ठीक चल रहा था और हमारे बाद भी वैसा चलता रहेगा। परमात्मा उतना...View More
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मानवीय गरिमा


हम आप सबके लिए संसार में एक महत्त्वपूर्ण स्थान है। जिसको हम अपने में उसकी पात्रता प्राप्त कर कभी भी पा सकते हैं। आइए प्रमाद छोड़कर पुरुषार्थी बनें। अस्त- व्यस्तता से पीछा छुड़ाकर व्यवस्थित जीवन व कार्य पद्धति अपनाएँ। अपने परिश्रम एवं पसीने...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


हम आप सबके लिए संसार में एक महत्त्वपूर्ण स्थान है। जिसको हम अपने में उसकी पात्रता प्राप्त कर कभी भी पा सकते हैं। आइए प्रमाद छोड़कर पुरुषार्थी बनें। अस्त- व्यस्तता से पीछा छुड़ाकर व्यवस्थित जीवन व कार्य पद्धति अपनाएँ। अपने परिश्रम एवं पसीने...View More
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सफल सार्थक जीवन


किसी व्यक्ति के कहने से अथवा किसी आपत्ति के आने से अपने आत्म- विश्वास को डगमगाने मत दो। कदाचित आप अपनी संपत्ति, अपने स्वास्थ्य, अपने यश और अन्य लोगों के सम्मान खो बैठो, पर जब तक आप अपने ऊपर श्रद्धा कायम रखोगे, तब...View More
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मानवीय गरिमा


किसी व्यक्ति के कहने से अथवा किसी आपत्ति के आने से अपने आत्म- विश्वास को डगमगाने मत दो। कदाचित आप अपनी संपत्ति, अपने स्वास्थ्य, अपने यश और अन्य लोगों के सम्मान खो बैठो, पर जब तक आप अपने ऊपर श्रद्धा कायम रखोगे, तब...View More
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प्रेरक विचार


किसी व्यक्ति के कहने से अथवा किसी आपत्ति के आने से अपने आत्म- विश्वास को डगमगाने मत दो। कदाचित आप अपनी संपत्ति, अपने स्वास्थ्य, अपने यश और अन्य लोगों के सम्मान खो बैठो, पर जब तक आप अपने ऊपर श्रद्धा कायम रखोगे, तब...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


उन्नति के मार्ग पर किसी के लिए प्रतिबन्ध नहीं है। वे सबके लिए समान रूप से खुले हैं। परमात्मा के विधान में अन्याय अथवा पक्षपात की कोई गुंजाइश नहीं है। जो व्यक्ति अपने अंदर जितने अधिक गुण, जितनी अधिक क्षमता और जितनी अधिक...View More
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युग निर्माण योजना


उन्नति के मार्ग पर किसी के लिए प्रतिबन्ध नहीं है। वे सबके लिए समान रूप से खुले हैं। परमात्मा के विधान में अन्याय अथवा पक्षपात की कोई गुंजाइश नहीं है। जो व्यक्ति अपने अंदर जितने अधिक गुण, जितनी अधिक क्षमता और जितनी अधिक...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


ऐसा विचार मत करो कि उसका भाग्य उसे जहाँ- तहाँ भटका रहा है और इस रहस्यमय भाग्य के सामने उसका क्या बस चल सकता है। उसको मन से निकाल देने का प्रयत्न करना चाहिए। किसी तरह के भाग्य से मनुष्य बड़ा है...View More
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कर्मफल और ईश्वर


ऐसा विचार मत करो कि उसका भाग्य उसे जहाँ- तहाँ भटका रहा है और इस रहस्यमय भाग्य के सामने उसका क्या बस चल सकता है। उसको मन से निकाल देने का प्रयत्न करना चाहिए। किसी तरह के भाग्य से मनुष्य बड़ा है...View More
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मानवीय गरिमा


ऐसा कोई नियम नहीं है कि आप सफलता की आशा रखे बिना, अभिलाषा किये बिना, उसके लिए दृढ़ प्रयत्न किये बिना ही सफलता प्राप्त कर सको। प्रत्येक ऊँची सफलता के लिए पहले मजबूत, दृढ़, आत्म श्रद्धा का होना अनिवार्य है। इसके बिना सफलता...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


ऐसा कोई नियम नहीं है कि आप सफलता की आशा रखे बिना, अभिलाषा किये बिना, उसके लिए दृढ़ प्रयत्न किये बिना ही सफलता प्राप्त कर सको। प्रत्येक ऊँची सफलता के लिए पहले मजबूत, दृढ़, आत्म श्रद्धा का होना अनिवार्य है। इसके बिना सफलता...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


इस संसार में अच्छाइयों की कमी नहीं। श्रेष्ठ और सज्जन व्यक्ति भी सर्वत्र भरे पड़े हैं, फिर हर व्यक्ति में कुछ अच्छाई तो होती ही है। यदि छिद्रान्वेषण छोड़कर हम गुण अन्वेषण करने का अपना स्वभाव बना लें, तो घृणा और...View More
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प्रेरक विचार


इस संसार में अच्छाइयों की कमी नहीं। श्रेष्ठ और सज्जन व्यक्ति भी सर्वत्र भरे पड़े हैं, फिर हर व्यक्ति में कुछ अच्छाई तो होती ही है। यदि छिद्रान्वेषण छोड़कर हम गुण अन्वेषण करने का अपना स्वभाव बना लें, तो घृणा और...View More
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मानवीय गरिमा


असंख्यों बार यह परीक्षण हो चुके हैं कि दुष्टता किसी के लिए भी लाभदायक सिद्ध नहीं हुई। जिसने भी उसे अपनाया वह घाटे में रहा और वातावरण दूषित बना। अब यह परीक्षण आगे भी चलते रहने से कोई लाभ नहीं। हम अपना...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


असंख्यों बार यह परीक्षण हो चुके हैं कि दुष्टता किसी के लिए भी लाभदायक सिद्ध नहीं हुई। जिसने भी उसे अपनाया वह घाटे में रहा और वातावरण दूषित बना। अब यह परीक्षण आगे भी चलते रहने से कोई लाभ नहीं। हम अपना...View More
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प्रेरक विचार


असंख्यों बार यह परीक्षण हो चुके हैं कि दुष्टता किसी के लिए भी लाभदायक सिद्ध नहीं हुई। जिसने भी उसे अपनाया वह घाटे में रहा और वातावरण दूषित बना। अब यह परीक्षण आगे भी चलते रहने से कोई लाभ नहीं। हम अपना...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


परस्पर प्रोत्साहन न देना हमारे व्यक्तिगत सामाजिक जीवन की एक बहुत बड़ी कमजोरी है। किसी को प्रोत्साहन भरे दो शब्द कहने के बजाय लोग उसे खरी- खोटी असफलता की बातें कर निरुत्साहित करते हैं, हिम्मत तोड़ते हैं, जिससे दूसरों को निराशा, असंभावनाओं...View More
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प्रेरक विचार


परस्पर प्रोत्साहन न देना हमारे व्यक्तिगत सामाजिक जीवन की एक बहुत बड़ी कमजोरी है। किसी को प्रोत्साहन भरे दो शब्द कहने के बजाय लोग उसे खरी- खोटी असफलता की बातें कर निरुत्साहित करते हैं, हिम्मत तोड़ते हैं, जिससे दूसरों को निराशा, असंभावनाओं...View More
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मानवीय गरिमा


जिसने अनीति के मार्ग पर चलकर धन कमाया, उनकी वह कमाई चोरी, बीमारी, विलासिता, मुकदमा, नशा, रिश्वत, व्यभिचार आदि बुरे मार्गों में खर्च होती देखी गई है। जैसी आई थी, वैसे ही चली जाती है। पश्चाताप, पाप और निन्दा का ऐसा उपहार अंततः वह छोड़ जाती...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


जिसने अनीति के मार्ग पर चलकर धन कमाया, उनकी वह कमाई चोरी, बीमारी, विलासिता, मुकदमा, नशा, रिश्वत, व्यभिचार आदि बुरे मार्गों में खर्च होती देखी गई है। जैसी आई थी, वैसे ही चली जाती है। पश्चाताप, पाप और निन्दा का ऐसा उपहार अंततः वह छोड़ जाती...View More
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धर्म और विज्ञान


हम ऊपरी आडम्बर देखकर किसी गलत व्यक्ति को आदर देकर दुष्प्रवृत्तियों को प्रोत्साहित करने के दोषी बन जाते हैं। इसके विपरीत यदि हमारी आदर बुद्धि विवेकपूर्ण भूमिका प्रस्तुत करे तो कुमार्ग पर चलने वाले कितने ही कदमों को रोक कर उन्हें...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


हम ऊपरी आडम्बर देखकर किसी गलत व्यक्ति को आदर देकर दुष्प्रवृत्तियों को प्रोत्साहित करने के दोषी बन जाते हैं। इसके विपरीत यदि हमारी आदर बुद्धि विवेकपूर्ण भूमिका प्रस्तुत करे तो कुमार्ग पर चलने वाले कितने ही कदमों को रोक कर उन्हें...View More
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