Chintan Quotes

आध्यात्मिक चिंतन धारा


वास्तविक अध्यात्म :-
सच्चरित्रता, सदाचार, संयम, परमार्थ जैसे गुणों पर आधारित अध्यात्म ही सच्चा अध्यात्म है। अपने गुण, कर्म, स्वभाव का शोधन और जीवन विकास के उच्च गुणों का अभ्यास करना ही साधना है। भगवान को घट- घट वासी और न्यायकारी...View More
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सफल सार्थक जीवन


सद्गुरु को बना लें अपना नाविक:-
मनुष्य जीवन भी एक यात्रा है। जिसमें पग- पग पर कठिनाइयों के महासागर पार करने पड़ते है। इन्द्रियों की लालसाऍं- मन में पनपते भ्रमों की बहुतायत जीवन के पथ पर भटकाने की कोशिश...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


सद्गुरु को बना लें अपना नाविक:-
मनुष्य जीवन भी एक यात्रा है। जिसमें पग- पग पर कठिनाइयों के महासागर पार करने पड़ते है। इन्द्रियों की लालसाऍं- मन में पनपते भ्रमों की बहुतायत जीवन के पथ पर भटकाने की कोशिश...View More
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मानवीय गरिमा


युग निर्माण परिवार के परिजनों को निरंतर आत्मनिरीक्षण करना चाहिये और देखना चाहिये कि भारत के औसत नागरिक के स्तर से वह अपने ऊपर अधिक खर्च तो नहीं करता? यदि करता है, तो आत्मा की, न्याय की, कर्तव्य की पुकार...View More
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युग निर्माण योजना


युग निर्माण परिवार के परिजनों को निरंतर आत्मनिरीक्षण करना चाहिये और देखना चाहिये कि भारत के औसत नागरिक के स्तर से वह अपने ऊपर अधिक खर्च तो नहीं करता? यदि करता है, तो आत्मा की, न्याय की, कर्तव्य की पुकार...View More
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प्रेरक विचार


एकला चलो रे
हम अकेले चलें। सूर्य- चन्द्र की तरह अकेले चलने में हमें तनिक भी संकोच न हों। अपनी आस्थाओं को दूसरों के कहे- सुने अनुसार नहीं, वरन् अपने स्वतंत्र चिंतन के आधार पर विकसित करें। अंधी View More
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युग निर्माण योजना


एकला चलो रे
हम अकेले चलें। सूर्य- चन्द्र की तरह अकेले चलने में हमें तनिक भी संकोच न हों। अपनी आस्थाओं को दूसरों के कहे- सुने अनुसार नहीं, वरन् अपने स्वतंत्र चिंतन के आधार पर विकसित करें। अंधी View More
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स्वाध्याय और सदविचार


कुविचारों और दुःस्वभावों से पीछा छुड़ाने का तरीका यह है कि सद् विचारों के सम्पर्क में निरन्तर रहा जाये उनका स्वाध्याय, सत्संग और चिंतन- मनन किया जाये। साथ ही अपने सम्पर्क क्षेत्र में सुधार कार्य जारी रखा जाये। सत्प्रवृत्ति सम्वर्धन...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


आशा आध्यात्मिक जीवन का शुभ आरम्भ है। आशावादी व्यक्ति सर्वत्र परमात्मा की सत्ता विराजमान देखता है। उसे सर्वत्र मंगलमय परमात्मा की मंगलदायक कृपा बरसती दिखाई देती है। सच्ची शान्ति, सुख और संतोष मनुष्य की निराशावादी प्रवृत्ति के कारण नहीं, अपने ऊपर अपनी...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


गुरु का स्वरूप मंगलकारी है, वह सदैव शिष्य की हित- कामना ही करता है। कई बार शिष्य को गुरु की बात समझ में नहीं आती, किन्तु इस बात को गुरु ही समझ सकता है कि कब, किस तरह शिष्य का कल्याण करना...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


जीवात्मा सत्य है, शिव है और सुन्दरता से युक्त भी। उसी की शक्ति एवं प्रकाश की छाया से बहिर्जगत यथार्थ लगता है। सत्य और शिव से, सुन्दरता से युक्त जीवात्मा की प्रतिच्छाया मात्र से यह संसार इतना यथार्थ, सुन्दर एवं आनंददायक...View More
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धर्म और विज्ञान


धर्म मनोवैज्ञानिक दृष्टि से शरीर एवं मन को स्वस्थ बनाने का सशक्त माध्यम है संयम नीति- मर्यादाओं के पालन एवं उच्चस्तरीय आदर्शों को अपनाने से मन स्वस्थ एवं प्रसन्न रहता है। फलस्वरूप उसका प्रभाव आरोग्य के रूप में दिखाई पड़ता...View More
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कर्मफल और ईश्वर


कर्म तथा शक्ति जहाँ एक- दूसरे पर निर्भर हैं, वहाँ परस्पर पूरक भी है। शक्ति के बिना कर्म नहीं और कर्म रहित शक्ति का हास हो जाता है। अतएव शक्तिशाली बनें रहने के लिये मनुष्य को निरन्तर कर्म करते रहना...View More
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प्रेरक विचार


कर्म तथा शक्ति जहाँ एक- दूसरे पर निर्भर हैं, वहाँ परस्पर पूरक भी है। शक्ति के बिना कर्म नहीं और कर्म रहित शक्ति का हास हो जाता है। अतएव शक्तिशाली बनें रहने के लिये मनुष्य को निरन्तर कर्म करते रहना...View More
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सफल सार्थक जीवन


कुशलतापुर्वक कार्य करने का नाम ही योग है।कुशल व्यक्ति संसार में सच्ची प्रगति कर सकता है। जीवन का सर्वोच्य लक्ष्य यही है कि मनुष्य प्रत्येक कार्य को विवेकपूर्वक करे। इससे मन निर्मल रहता है,आत्मा सजग हो जाती है और मस्तिष्क परिष्कृत रहता है। ऐसे विचारशील व्यक्ति को संशय और मोहग्रस्त होकर भटकना नहीं पड़ता।

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मानवीय गरिमा


सहृदयता मानवीय गरिमा का मेरुदण्ड है।जिसका सम्बल पाकर ही व्यक्ति एवं समाज ऊंचे उठते, मानवी गुणों से भरे-पुरे बनते हैं। इसका अभाव निष्ठुरता, कठोरता, असहिष्णुता जैसी प्रवृत्तियों के रूप में प्रकट होता है।मानवी गरिमा के टुटते हुए इस मेरुदण्ड को हर कीमत पर बचाया जाना चाहिये। 

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समाज निर्माण


सहृदयता मानवीय गरिमा का मेरुदण्ड है।जिसका सम्बल पाकर ही व्यक्ति एवं समाज ऊंचे उठते, मानवी गुणों से भरे-पुरे बनते हैं। इसका अभाव निष्ठुरता, कठोरता, असहिष्णुता जैसी प्रवृत्तियों के रूप में प्रकट होता है।मानवी गरिमा के टुटते हुए इस मेरुदण्ड को हर कीमत पर बचाया जाना चाहिये। 

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प्रेरक विचार


दृष्टिकोण में संयम, सहकार, संतुलन, स्नेह, सद् भाव,श्रम, साहस जैसे सद्गुणों का महत्व समझने और अपने स्वभाव, व्यवहार को सज्जनोचित्त बनाने की उपयोगिता समाविष्ट हो सके, तो समझना चाहिये कि आज गई-गुजरी स्थिति होने पर भी कल इन्हीं विशेषताओं के कारण उज्ज्वल भविष्य का सरंजाम जुटाना सुनिश्चित है।

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गायत्री और यज्ञ


आदर्शवादी और उत्कृष्टतावादी चिंतन के साथ जब गायत्री उपासना की जाती है, तो उसे सोने में सुहागा मिलने की तरह सराहा जाता है। इस सम्बन्ध में अपना दृष्टिकोण साफ रखना चाहिये कि उपासना का जितना महत्व है, उतना ही,बल्कि उससे भी कहीं अधिक महत्व साधना का है।

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शांतिकुंज -21 वीं सदी की गंगोत्री


गंगा गोमुख से निकलती है और यमुना यमुनोत्री से, नर्मदा का अवतरण अमरकण्टक के एक छोटे से कुण्ड से होता है।मान सरोवर से ब्रह्मपुत्र निकलती है।शान्तिकुंज ऐसे अनेकों प्रवाहों को प्रवाहित कर रहा है, जिसका प्रभाव न केवल भारत को वरन् समूचे विश्व को एक नई दिशा में घसीटता हुआ ले जाएगा।

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समय का सदुपयोग


समय को बर्बाद करने वाला और श्रम से जी चुराने वाला अपना शत्रु आप है। उसे बाहरी शत्रुओं की क्या आवश्यकता? अपनी बर्बादी के लिए यह दो दुर्गुण जिसने पाल रखे हैं, उसे शनि और राहु की दशा की प्रतीक्षा न करनी...View More
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प्रेरक विचार


सेवा वृत्ति हमारे स्वभाव का एक अंग होना चाहिए। इस एक मानवीय कर्तृत्व को पुण्य- परमार्थ की दृष्टि से ही किया जाना चाहिए। यदि इसके बदले यश की, प्रत्युपकार की आशा की जायगी तो सेवा कार्य बन ही न पड़ेगा।...View More
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समाज निर्माण


सेवा वृत्ति हमारे स्वभाव का एक अंग होना चाहिए। इस एक मानवीय कर्तृत्व को पुण्य- परमार्थ की दृष्टि से ही किया जाना चाहिए। यदि इसके बदले यश की, प्रत्युपकार की आशा की जायगी तो सेवा कार्य बन ही न पड़ेगा।...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


आशाजनक विचारों में बड़ी विलक्षण शक्ति भरी हुई है। हमारी अभिलाषाएँ यदि वे सात्विक और पवित्र हैं तो अवश्य पूर्ण होंगी, हमारे मनोरथ सिद्ध होंगे। हमारे लिए जो कुछ होगा वह अच्छा ही होगा, बुरा कभी न होगा। इस तरह के शुभ,...View More
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प्रेरक विचार


आशाजनक विचारों में बड़ी विलक्षण शक्ति भरी हुई है। हमारी अभिलाषाएँ यदि वे सात्विक और पवित्र हैं तो अवश्य पूर्ण होंगी, हमारे मनोरथ सिद्ध होंगे। हमारे लिए जो कुछ होगा वह अच्छा ही होगा, बुरा कभी न होगा। इस तरह के शुभ,...View More
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कर्मफल और ईश्वर


प्रत्येक कार्य एक कला है, चाहे वह छोटा हो या बड़ा। प्रत्येक कार्य का मौलिक आधार समान है। जिस तरह एक कलाकार अपनी कला से प्रेम करता है, उसमें तन्मयता के साथ खो जाता है, उसके प्रति दिलचस्पी और लगन का अटूट स्रोत...View More
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मानवीय गरिमा


मनुष्य की गरिमा के तीन आधार स्तम्भ हैं-
१) जीवन की पवित्रता,
२) क्रियाकलाप की प्रामाणिकता और
३) लोकसेवा के प्रति श्रद्धा
जिनके पास यह तीन विभूतियाँ हैं, उनके लिए महामानव बनने का द्वार सदैव खुला पड़ा...View More
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सफल सार्थक जीवन


इस दुनिया में तीन बड़े सत्य हैं-
) आशा,
२) आस्था और
) आत्मीयता
जिसने सच्चे मन से इन तीनों को जितनी मात्रा में हृदयंगम किया, समझना चाहिए कि सफल जीवन का आधार उसे उतनी ही...View More
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भाव संवेदना


संयम शरीर में अवस्थित भगवान् है। सद्विचार मस्तिष्क में निवास करने वाला परमेश्वर है। अंतरात्मा में ईश्वर की और भी ऊँची झाँकी देखनी हो तो सद्भावनाओं के रूप में देखनी चाहिए। ईश्वर दर्शन के लिए कहीं बाहर जाने की आवश्यकता नहीं,...View More
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प्रेरक विचार


संयम शरीर में अवस्थित भगवान् है। सद्विचार मस्तिष्क में निवास करने वाला परमेश्वर है। अंतरात्मा में ईश्वर की और भी ऊँची झाँकी देखनी हो तो सद्भावनाओं के रूप में देखनी चाहिए। ईश्वर दर्शन के लिए कहीं बाहर जाने की आवश्यकता नहीं,...View More
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