Chintan Quotes

आध्यात्मिक चिंतन धारा


इन दिनों अगणित संकटों और झंझटों का सामना करना पड़ रहा है। उनका निमित्त कारण अपना भटकाव ही है, जिसे कोई चाहे तो अनर्थ आचरण भी कह सकता है। गलती करने वाले पर ही यह दायित्व भी लद जाता है कि वही...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


समाज का ऋण हर एक पर है। उसे चुकाना ही चाहिए। इस ऋण से उऋण हुए बिना कोई व्यक्ति जीवन लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकता। हमें अपनी विचार पद्धति में सामूहिकता के लिए, सामाजिकता के लिए समन्वय और सहिष्णुता के लिए समुचित...View More
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समाज निर्माण


समाज का ऋण हर एक पर है। उसे चुकाना ही चाहिए। इस ऋण से उऋण हुए बिना कोई व्यक्ति जीवन लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकता। हमें अपनी विचार पद्धति में सामूहिकता के लिए, सामाजिकता के लिए समन्वय और सहिष्णुता के लिए समुचित...View More
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मानवीय गरिमा


हम जियें, हँसी- खुशी और आनंदपूर्वक जियें- यह ठीक भी है और इसका हमें अधिकार भी है। तथापि हमें अपनी हँसी- खुशी में दूसरों को भी भाग देना चाहिए। हम तो आमोद- प्रमोद और आनंद- मंगल मनाते चलें और हमारे आसपास का समाज दुःख...View More
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समाज निर्माण


हम जियें, हँसी- खुशी और आनंदपूर्वक जियें- यह ठीक भी है और इसका हमें अधिकार भी है। तथापि हमें अपनी हँसी- खुशी में दूसरों को भी भाग देना चाहिए। हम तो आमोद- प्रमोद और आनंद- मंगल मनाते चलें और हमारे आसपास का समाज दुःख...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


समाज में हो रही बुराइयों को रोकने के लिए ईश्वर ने सामूहिक जिम्मेदारी हर व्यक्ति को सौंपी है। उसका कर्तव्य है कि अनीति जहाँ कहीं भी हो रही है, उसे रोके, घटाने का प्रयत्न करे, विरोध करे, असहयोग बरते। जो भी तरीका उसको...View More
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समाज निर्माण


समाज में हो रही बुराइयों को रोकने के लिए ईश्वर ने सामूहिक जिम्मेदारी हर व्यक्ति को सौंपी है। उसका कर्तव्य है कि अनीति जहाँ कहीं भी हो रही है, उसे रोके, घटाने का प्रयत्न करे, विरोध करे, असहयोग बरते। जो भी तरीका उसको...View More
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युग निर्माण योजना


समाज में हो रही बुराइयों को रोकने के लिए ईश्वर ने सामूहिक जिम्मेदारी हर व्यक्ति को सौंपी है। उसका कर्तव्य है कि अनीति जहाँ कहीं भी हो रही है, उसे रोके, घटाने का प्रयत्न करे, विरोध करे, असहयोग बरते। जो भी तरीका उसको...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


बाढ़, भूकम्प, दुर्भिक्ष, महामारी, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, युद्ध आदि दैवी प्रकोपों को मानव जाति के सामूहिक पापों का परिणाम माना गया है। निर्दोष व्यक्ति भी गेहूँ के साथ घुन की तरह पिसते हैं। वस्तुतः वे भी निर्दोष नहीं होते। सामूहिक दोषों को हटाने का प्रयत्न न...View More
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समाज निर्माण


बाढ़, भूकम्प, दुर्भिक्ष, महामारी, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, युद्ध आदि दैवी प्रकोपों को मानव जाति के सामूहिक पापों का परिणाम माना गया है। निर्दोष व्यक्ति भी गेहूँ के साथ घुन की तरह पिसते हैं। वस्तुतः वे भी निर्दोष नहीं होते। सामूहिक दोषों को हटाने का प्रयत्न न...View More
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युग निर्माण योजना


बाढ़, भूकम्प, दुर्भिक्ष, महामारी, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, युद्ध आदि दैवी प्रकोपों को मानव जाति के सामूहिक पापों का परिणाम माना गया है। निर्दोष व्यक्ति भी गेहूँ के साथ घुन की तरह पिसते हैं। वस्तुतः वे भी निर्दोष नहीं होते। सामूहिक दोषों को हटाने का प्रयत्न न...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


मनुष्यों पर ऋषियों का भी ऋण है। ऋषि का अर्थ है- वेद। वेद अर्थात् ज्ञान। आज तक जो हमारा विकास हुआ है, उसका श्रेय ज्ञान को है- ऋषियों को है। जिस तरह हम ज्ञान दूसरों से ग्रहण कर विकसित हुए हैं, उसी तरह अपने...View More
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समाज निर्माण


मनुष्यों पर ऋषियों का भी ऋण है। ऋषि का अर्थ है- वेद। वेद अर्थात् ज्ञान। आज तक जो हमारा विकास हुआ है, उसका श्रेय ज्ञान को है- ऋषियों को है। जिस तरह हम ज्ञान दूसरों से ग्रहण कर विकसित हुए हैं, उसी तरह अपने...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


हमें अपने काम से काम, अपने मतलब से मतलब कहने मात्र से काम नहीं चल सकता। ऐसा करने से बुरों का विरोध न हो सकेगा और वे मनमानी करके अपनी दुष्टता बढ़ाते हुए दूसरे लोगों के लिए दिन- दिन अधिक भयंकर...View More
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समाज निर्माण


हमें अपने काम से काम, अपने मतलब से मतलब कहने मात्र से काम नहीं चल सकता। ऐसा करने से बुरों का विरोध न हो सकेगा और वे मनमानी करके अपनी दुष्टता बढ़ाते हुए दूसरे लोगों के लिए दिन- दिन अधिक भयंकर...View More
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मानवीय गरिमा


अमीरी का सम्मान यह हमारा एक ऐसा दूषित सामाजिक दृष्टिकोण है जिसके कारण लोग अनुचित रीति से भी धन कमाने में संकोच नहीं करते। धनी लोग अपने धन के द्वारा सुख भोगें, इसमें हर्ज नहीं, पर उन्हें इसी कारण सम्मान मिले...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


अमीरी का सम्मान यह हमारा एक ऐसा दूषित सामाजिक दृष्टिकोण है जिसके कारण लोग अनुचित रीति से भी धन कमाने में संकोच नहीं करते। धनी लोग अपने धन के द्वारा सुख भोगें, इसमें हर्ज नहीं, पर उन्हें इसी कारण सम्मान मिले...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


धन कमाने, पद प्राप्त करने या चातुर्य दिखाने में कोई व्यक्ति सफल हो जाय तो भी यदि वह भावना और कर्तृत्व की दृष्टि से गिरा हुआ है तो उसे सामाजिक दृष्टि से अवांछनीय व्यक्ति ही माना जायेगा। उसकी सफलताएँ उसके निज...View More
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मानवीय गरिमा


संसार के अन्य समाजों की बात तो नहीं कही जा सकती, पर अपने भारतीय समाज की यह पद्धति कभी नहीं रही कि दूसरों के कष्ट- क्लेशों की उपेक्षा करके आनंद मनाया जाये। आनंद जीव की सहज प्रवृत्ति है। यह सुर दुर्लभ मानव...View More
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भारतीय संस्कृति


संसार के अन्य समाजों की बात तो नहीं कही जा सकती, पर अपने भारतीय समाज की यह पद्धति कभी नहीं रही कि दूसरों के कष्ट- क्लेशों की उपेक्षा करके आनंद मनाया जाये। आनंद जीव की सहज प्रवृत्ति है। यह सुर दुर्लभ मानव...View More
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मानवीय गरिमा


सफलता की अपेक्षा नीति श्रेष्ठ है। अपने आपको नीति पर चलाते हुए यदि असफलता भी मिलती है तो वह गौरव की बात है और यदि अनीतिपूर्वक इन्द्रासन भी प्राप्त होता है तो वह गर्हित ही है। सफलता न मिलने से भौतिक...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


सफलता की अपेक्षा नीति श्रेष्ठ है। अपने आपको नीति पर चलाते हुए यदि असफलता भी मिलती है तो वह गौरव की बात है और यदि अनीतिपूर्वक इन्द्रासन भी प्राप्त होता है तो वह गर्हित ही है। सफलता न मिलने से भौतिक...View More
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मानवीय गरिमा


संसार के इतिहास में ऐसे असंख्य व्यक्ति भरे पड़े हैं, जिनको जीवन में विद्यालय के दर्शन न हो सके, किन्तु स्वाध्याय के बल पर विश्व के विशेष विद्वान् व्यक्ति बने हैं। साथ ही ऐसे व्यक्तियों की भी कमी नहीं है, जिनकी जिंदगी...View More
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स्वाध्याय और सदविचार


संसार के इतिहास में ऐसे असंख्य व्यक्ति भरे पड़े हैं, जिनको जीवन में विद्यालय के दर्शन न हो सके, किन्तु स्वाध्याय के बल पर विश्व के विशेष विद्वान् व्यक्ति बने हैं। साथ ही ऐसे व्यक्तियों की भी कमी नहीं है, जिनकी जिंदगी...View More
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स्वाध्याय और सदविचार


स्वाध्यायशील व्यक्ति अपनी आत्मा का सफल चिकित्सक होता है। स्वाध्याय से उपार्जित ज्ञान द्वारा वह अपनी आत्मिक व्याधियों को जान लेता है और उनका निदान निर्धारित कर लेता है। निदान खोज लेने पर व्याधियों का उपचार तो सहज ही में हो...View More
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प्रेरक विचार


स्वाध्यायशील व्यक्ति अपनी आत्मा का सफल चिकित्सक होता है। स्वाध्याय से उपार्जित ज्ञान द्वारा वह अपनी आत्मिक व्याधियों को जान लेता है और उनका निदान निर्धारित कर लेता है। निदान खोज लेने पर व्याधियों का उपचार तो सहज ही में हो...View More
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मानवीय गरिमा


झूठ किसी भी तरह, किसी भी बहाने से, किसी भी कारण क्यों न बोला जाय, आखिर वह झूठ ही है और उससे व्यक्ति तथा समाज का जीवन प्रभावित हुए बिना नहीं रहता। झूठ के दुष्परिणाम व्यक्ति और समाज दोनों को ही भुगतने...View More
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कर्मफल और ईश्वर


झूठ किसी भी तरह, किसी भी बहाने से, किसी भी कारण क्यों न बोला जाय, आखिर वह झूठ ही है और उससे व्यक्ति तथा समाज का जीवन प्रभावित हुए बिना नहीं रहता। झूठ के दुष्परिणाम व्यक्ति और समाज दोनों को ही भुगतने...View More
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समाज निर्माण


झूठ किसी भी तरह, किसी भी बहाने से, किसी भी कारण क्यों न बोला जाय, आखिर वह झूठ ही है और उससे व्यक्ति तथा समाज का जीवन प्रभावित हुए बिना नहीं रहता। झूठ के दुष्परिणाम व्यक्ति और समाज दोनों को ही भुगतने...View More
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भारतीय संस्कृति


मानवता का ही दूसरा नाम- भारतीय धर्म, भारतीय सभ्यता, भारतीय संस्कृति है। हमारे पूर्वज मनुष्यता के उपासक रहे हैं। उन्होंने साध्य की प्राप्ति के लिए साधन की पवित्रता की कभी भी उपेक्षा नहीं की है। वरन् इस बात पर जोर दिया है कि...View More
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