Chintan Quotes

प्रेरक विचार


मानवता का ही दूसरा नाम- भारतीय धर्म, भारतीय सभ्यता, भारतीय संस्कृति है। हमारे पूर्वज मनुष्यता के उपासक रहे हैं। उन्होंने साध्य की प्राप्ति के लिए साधन की पवित्रता की कभी भी उपेक्षा नहीं की है। वरन् इस बात पर जोर दिया है कि...View More
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सफल सार्थक जीवन


जुआ का व्यसन हर तरह से हानिकारक और पतनकारी है। जो हारता है, वह तो तरह- तरह की आपत्तियों में फँस जाता ही है, पर जो जीतता है वह भी उसे मुफ्त का माल समझकर तरह- तरह की दुर्व्यसनों और खराब कामों...View More
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मानवीय गरिमा


जुआ का व्यसन हर तरह से हानिकारक और पतनकारी है। जो हारता है, वह तो तरह- तरह की आपत्तियों में फँस जाता ही है, पर जो जीतता है वह भी उसे मुफ्त का माल समझकर तरह- तरह की दुर्व्यसनों और खराब कामों...View More
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प्रेरक विचार


जुआ का व्यसन हर तरह से हानिकारक और पतनकारी है। जो हारता है, वह तो तरह- तरह की आपत्तियों में फँस जाता ही है, पर जो जीतता है वह भी उसे मुफ्त का माल समझकर तरह- तरह की दुर्व्यसनों और खराब कामों...View More
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धर्म और विज्ञान


धर्म के लिए, धर्म के कारण कभी कोई झगड़ा नहीं होता। झगड़ों का कारण है- साम्प्रदायिकता। साम्प्रदायिकता का अर्थ है- संकीर्णता, अनुदारता, स्वार्थपरता, अहंकारिता। यह दूषित मनोवृत्ति जिस क्षेत्र में प्रविष्ट हो जाती है, वहीं समाज में भारी विद्वेष, घृणा, शोषण, उत्पीड़न, क्रूरता तथा अनाचार का बोलबाला...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


धर्म के लिए, धर्म के कारण कभी कोई झगड़ा नहीं होता। झगड़ों का कारण है- साम्प्रदायिकता। साम्प्रदायिकता का अर्थ है- संकीर्णता, अनुदारता, स्वार्थपरता, अहंकारिता। यह दूषित मनोवृत्ति जिस क्षेत्र में प्रविष्ट हो जाती है, वहीं समाज में भारी विद्वेष, घृणा, शोषण, उत्पीड़न, क्रूरता तथा अनाचार का बोलबाला...View More
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मानवीय गरिमा


प्रलोभन एक तेज आँधी के समान है, जो मजबूत चरित्र को भी, यदि वह सतर्क न रहे, गिराने की शक्ति रखता है। जो व्यक्ति सदैव जागरूक रहता है, वह ही संसार के नाना प्रलोभनों, आकर्षणों, मिथ्या दम्भ, दिखावा, टीपटाप से मुक्त रह सकता है। यदि एक...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


प्रलोभन एक तेज आँधी के समान है, जो मजबूत चरित्र को भी, यदि वह सतर्क न रहे, गिराने की शक्ति रखता है। जो व्यक्ति सदैव जागरूक रहता है, वह ही संसार के नाना प्रलोभनों, आकर्षणों, मिथ्या दम्भ, दिखावा, टीपटाप से मुक्त रह सकता है। यदि एक...View More
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सफल सार्थक जीवन


कुछ व्यक्ति कहते हैं कि फिजूलखर्ची समाज कराता है, हम क्या करें? समाज आर्थिक मूल्यों को ही मान्यता देता है। यदि हम बन- ठन कर समाज में दिखावा नहीं करेंगे तो समाज में हमारी कौन पूछ होगी। खरबूजा को देखकर खरबूजा रंग...View More
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मानवीय गरिमा


कुछ व्यक्ति कहते हैं कि फिजूलखर्ची समाज कराता है, हम क्या करें? समाज आर्थिक मूल्यों को ही मान्यता देता है। यदि हम बन- ठन कर समाज में दिखावा नहीं करेंगे तो समाज में हमारी कौन पूछ होगी। खरबूजा को देखकर खरबूजा रंग...View More
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समाज निर्माण


कुछ व्यक्ति कहते हैं कि फिजूलखर्ची समाज कराता है, हम क्या करें? समाज आर्थिक मूल्यों को ही मान्यता देता है। यदि हम बन- ठन कर समाज में दिखावा नहीं करेंगे तो समाज में हमारी कौन पूछ होगी। खरबूजा को देखकर खरबूजा रंग...View More
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मानवीय गरिमा


शुभ कार्यों में लगने वालों, उन्नति और विकास की ओर बढ़ने वालों के समक्ष एक ही मार्ग है दृढ़ता के साथ अपने लक्ष्य की ओर निरन्तर गतिशील रहना। एक बार शुभ लक्ष्य और उत्कृष्ट मार्ग का चुनाव कर फिर उस...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


शुभ कार्यों में लगने वालों, उन्नति और विकास की ओर बढ़ने वालों के समक्ष एक ही मार्ग है दृढ़ता के साथ अपने लक्ष्य की ओर निरन्तर गतिशील रहना। एक बार शुभ लक्ष्य और उत्कृष्ट मार्ग का चुनाव कर फिर उस...View More
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मानवीय गरिमा


सुख- दुःख हमारे अपने ही पैदा किए हुए, हमारी अपनी ही मनोभूमि के परिणाम हैं। हम अपनी मनोभूमि परिष्कृत करें, विचारों को उत्कृष्ट और रचनात्मक बनायें, भावनाएँ शुद्ध करें, इसी शर्त पर जीवन हमें सुख, शान्ति, प्रसन्नता, आनंद प्रदान करेगा, अन्यथा वह सदा असंतुष्ट और...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


सुख- दुःख हमारे अपने ही पैदा किए हुए, हमारी अपनी ही मनोभूमि के परिणाम हैं। हम अपनी मनोभूमि परिष्कृत करें, विचारों को उत्कृष्ट और रचनात्मक बनायें, भावनाएँ शुद्ध करें, इसी शर्त पर जीवन हमें सुख, शान्ति, प्रसन्नता, आनंद प्रदान करेगा, अन्यथा वह सदा असंतुष्ट और...View More
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सफल सार्थक जीवन


निराशा वह मानवीय दुर्गुण है, जो बुद्धि को भ्रमित कर देती है। मानसिक शक्तियों को लुंज- पुंज कर देती है। ऐसा व्यक्ति आधे मन से डरा- डरा सा कार्य करेगा। ऐसी अवस्था में सफलता प्राप्त कर सकना संभव ही कहाँ होगा? जहाँ आशा नहीं...View More
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मानवीय गरिमा


निराशा वह मानवीय दुर्गुण है, जो बुद्धि को भ्रमित कर देती है। मानसिक शक्तियों को लुंज- पुंज कर देती है। ऐसा व्यक्ति आधे मन से डरा- डरा सा कार्य करेगा। ऐसी अवस्था में सफलता प्राप्त कर सकना संभव ही कहाँ होगा? जहाँ आशा नहीं...View More
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मानवीय गरिमा


दुःख और कठिनाइयों में ही सच्चे हृदय से परमात्मा की याद आती है। सुख- सुविधाओं में तो भोग और तृप्ति की ही भावना बनी रहती है। इसलिए उचित यही है कि विपत्तियों का सच्चे हृदय से स्वागत करें। परमात्मा से माँगने लायक...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


दुःख और कठिनाइयों में ही सच्चे हृदय से परमात्मा की याद आती है। सुख- सुविधाओं में तो भोग और तृप्ति की ही भावना बनी रहती है। इसलिए उचित यही है कि विपत्तियों का सच्चे हृदय से स्वागत करें। परमात्मा से माँगने लायक...View More
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धर्म और विज्ञान


कहते हैं कि शनिश्चर और राहू की दशा सबसे खराब होती है और जब वे आती हैं तो बर्बाद कर देती हैं। इस कथन में कितनी सचाई है यह कहना कठिन है, पर यह नितान्त सत्य है कि आलस्य को शनिश्चर...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


कहते हैं कि शनिश्चर और राहू की दशा सबसे खराब होती है और जब वे आती हैं तो बर्बाद कर देती हैं। इस कथन में कितनी सचाई है यह कहना कठिन है, पर यह नितान्त सत्य है कि आलस्य को शनिश्चर...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


गायत्री को इष्ट मानने का अर्थ है- सत्प्रवृत्ति की सर्वोत्कृष्टता पर आस्था। गायत्री उपासना का अर्थ है- सत्प्रेरणा को इतनी प्रबल बनाना, जिसके कारण सन्मार्ग पर चले बिना रहा ही न जा सके। गायत्री उपासना का लक्ष्य यही है। यह प्रयोजन जिसका जितनी...View More
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सफल सार्थक जीवन


शब्द की शक्ति अल्प, निष्प्राण, कुंठित होने का एक प्रमुख कारण है उसका दुरुपयोग करना। बिना आवश्यकता के बिना प्रसंग बोलना, जरूरत से अधिक बोलना, हर समय उलटे सीधे बकते रहना, शब्द की शक्ति को नष्ट करना है। असंयम से कोई भी शक्ति क्षीण...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


शब्द की शक्ति अल्प, निष्प्राण, कुंठित होने का एक प्रमुख कारण है उसका दुरुपयोग करना। बिना आवश्यकता के बिना प्रसंग बोलना, जरूरत से अधिक बोलना, हर समय उलटे सीधे बकते रहना, शब्द की शक्ति को नष्ट करना है। असंयम से कोई भी शक्ति क्षीण...View More
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स्वाध्याय और सदविचार


मनोरंजन प्रधान उपन्यास, नाटक एवं शृंगार रस पूर्ण पुस्तक को पढ़ना स्वाध्याय नहीं है। इस प्रकार का साहित्य पढ़ना तो वास्तव में समय का दुरुपयोग एवं अपनी आत्मा को कलुषित करना है। सच्चा स्वाध्याय वही है, जिससे हमारी चिन्ताएँ दूर हों, हमारी शंका-...View More
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सफल सार्थक जीवन


किसी भी बात का समाज में प्रचार करने के लिए पहले उसे अपने जीवन में अपनाना आवश्यक है। समाज के अगुवा लोग जैसा आचरण करते हैं, उसका अनुकरण दूसरे लोग करते हैं। सामाजिक, राजनैतिक, धार्मिक कार्यकर्ता और नेता लोग जब अपने प्रत्यक्ष...View More
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सफल सार्थक जीवन


मौलिक चिंतन के लिए- स्वतंत्र विचारों की साधना के लिए सबसे आवश्यक और महत्त्वपूर्ण जो बात है वह यह कि अपनी अंतरात्मा की वाणी सुनें। हमारी आत्मा निरन्तर बोलती है, कहती है, हमें परामर्श देती है। उसे सुनने का यदि हम प्रयत्न करें...View More
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मानवीय गरिमा


मौलिक चिंतन के लिए- स्वतंत्र विचारों की साधना के लिए सबसे आवश्यक और महत्त्वपूर्ण जो बात है वह यह कि अपनी अंतरात्मा की वाणी सुनें। हमारी आत्मा निरन्तर बोलती है, कहती है, हमें परामर्श देती है। उसे सुनने का यदि हम प्रयत्न करें...View More
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सफल सार्थक जीवन


खेद का विषय है कि आज के युग में भाषा विज्ञान का जितना विकास हुआ है, वाणी को प्रभावशाली वैज्ञानिक रूप देने में जितना अन्वेषण हुआ है, उतना ही वाणी का व्यभिचार बढ़ गया है। आजकल शब्द ज्ञान के स्रोत न रहकर...View More
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प्रेरक विचार


खेद का विषय है कि आज के युग में भाषा विज्ञान का जितना विकास हुआ है, वाणी को प्रभावशाली वैज्ञानिक रूप देने में जितना अन्वेषण हुआ है, उतना ही वाणी का व्यभिचार बढ़ गया है। आजकल शब्द ज्ञान के स्रोत न रहकर...View More
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