Chintan Quotes

आध्यात्मिक चिंतन धारा


धैर्य और साहस का मूल्य तोप और तलवार से बढ़कर है। देशभक्ति और बलिदान की भावनाओं से ओतप्रोत नागरिक टैंकों और मिसाइलों से अधिक महत्त्वपूर्ण होते हैं। इसके विपरीत कंजूस, मुनाफाखोर, जखीरेबाज, कायर, डरपोक, देशद्रोही, उत्पाती, अपराधी वृत्ति के लोग राष्ट्रीय संकट के...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


विभिन्न विचारों, दृष्टिकोणों, स्वभावों के कारण भेद हो सकते हैं और यह उसी तरह स्वाभाविक है जैसे संसार और इसके पदार्थों की विभिन्नता- विचित्रता, किन्तु इनके साथ द्वेष, कटुता के भाव न हों, वरन् प्रेम से एक दूसरे को आदर की भावनाएँ दो, जिससे...View More
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भाव संवेदना


विभिन्न विचारों, दृष्टिकोणों, स्वभावों के कारण भेद हो सकते हैं और यह उसी तरह स्वाभाविक है जैसे संसार और इसके पदार्थों की विभिन्नता- विचित्रता, किन्तु इनके साथ द्वेष, कटुता के भाव न हों, वरन् प्रेम से एक दूसरे को आदर की भावनाएँ दो, जिससे...View More
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भारतीय संस्कृति


सुख और दुःख में मानसिक संतुलन को बनाये रहना धीर पुरुषों का काम है। कायर ही हड़बड़ी मचाते हैं। हमें कायर नहीं, धीर- वीर बनना चाहिए। जीवन में आते रहने वाले रंग- बिरंगे कडुवे- मीठे धूप- छाँव को संतुलित मन से देखना चाहिए और...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


सुख और दुःख में मानसिक संतुलन को बनाये रहना धीर पुरुषों का काम है। कायर ही हड़बड़ी मचाते हैं। हमें कायर नहीं, धीर- वीर बनना चाहिए। जीवन में आते रहने वाले रंग- बिरंगे कडुवे- मीठे धूप- छाँव को संतुलित मन से देखना चाहिए और...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


प्रेम के नाम पर आज ठगी, चापलूसी, वासना और शोषण की प्रवंचना तो खूब बढ़ी है, पर सच्चा प्रेम जिसमें आत्मदान और निःस्वार्थ सेवा का ही समावेश होता है, अब देखने को नहीं मिलता। इस आध्यात्मिक विभूति के अभाव में जीवन नीरस ही...View More
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युग निर्माण योजना


छोटे- छोटे मकान, पुलों का मामूली ओवरसियर बना लेते हैं, पर जब बड़ा बाँध बनाना होता है तो बड़े इंजीनियरों की आवश्यकता पड़ती है। मेजर आपरेशन छोटे अनुभवहीन डॉक्टरों के बस की बात नहीं। उसे सिद्धहस्त सर्जन ही करते हैं। समाज में...View More
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युग निर्माण योजना


अपनी यह आस्था चट्टान की तरह अडिग होनी चाहिए कि युग बदल रहा है, पुराने सड़े- गले मूल्यांकन नष्ट होने जा रहे हैं। दुनिया आज जिस लोभ- मोह और स्वार्थ- अनाचार के सर्वनाशी पथ पर दौड़ रही है उसे वापस लौटना पड़ेगा। अन्धपरम्पराओं...View More
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युग निर्माण योजना


युग परिवर्तन का अर्थ है- विचार परिवर्तन। जन- साधारण की वर्तमान मान्यताओं एवं आस्थाओं का स्तर बदला जा सके तो हाड़- माँस की दृष्टि से ज्यों का त्यों रहने पर भी मनुष्य आश्चर्यजनक रीति से बदल जाएगा। साधारण राजकुमार का भगवान बुद्ध, एक...View More
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युग निर्माण योजना


आप अपने त्याग को, अपनी भावना को, केवल भावना को ही नहीं, वरन उस काम को हमेशा याद रखें, जिसके लिए आपने साहस भरा कदम उठाया था। जिन्दगी बड़ी शानदार है, इस तथ्य को आपको समझना चाहिए।
  आपको यह समझना चाहिए...View More
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भाव संवेदना


हमारे विचारों को लोगों को पढ़ने दीजिए। जो हमारे विचार पढ़ लेगा, वही हमारा शिष्य है। हमारे विचार बड़े पैने है, तीखे हैं। हमारी सारी शक्ति हमारे विचारों में सीमाबद्ध है। दुनिया को हम पलट देने का जो दावा करते हैं, वह सिद्धियों से...View More
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युग निर्माण योजना


हमारे विचारों को लोगों को पढ़ने दीजिए। जो हमारे विचार पढ़ लेगा, वही हमारा शिष्य है। हमारे विचार बड़े पैने है, तीखे हैं। हमारी सारी शक्ति हमारे विचारों में सीमाबद्ध है। दुनिया को हम पलट देने का जो दावा करते हैं, वह सिद्धियों से...View More
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सुव्यवस्थित पारिवारिक संबंध


अगले दिनों धन का संग्रह कोई नहीं कर सकेगा क्योंकि आने वाले दिनों में धन के वितरण पर लोग जोर देंगे। शासन भी अगले दिनों आपको कुछ जमा नहीं करने देगा। अतः आप मालदार बनने का विचार छोड़ दें। आप अगर जमाखोरी...View More
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समाज निर्माण


अगले दिनों धन का संग्रह कोई नहीं कर सकेगा क्योंकि आने वाले दिनों में धन के वितरण पर लोग जोर देंगे। शासन भी अगले दिनों आपको कुछ जमा नहीं करने देगा। अतः आप मालदार बनने का विचार छोड़ दें। आप अगर जमाखोरी...View More
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धर्म और विज्ञान


आगामी दिनों प्रज्ञावतार का कार्य विस्तार होने वाला है। उस काम की जिम्मेदारी केवल ब्राह्मण तथा संत ही पूरा कर सकते हैं। आपको इन दो वर्गों में आकर खड़ा हो जाना चाहिए तथा प्रज्ञावतार के सहयोगी बनकर उनके कार्य को पूरा...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


आगामी दिनों प्रज्ञावतार का कार्य विस्तार होने वाला है। उस काम की जिम्मेदारी केवल ब्राह्मण तथा संत ही पूरा कर सकते हैं। आपको इन दो वर्गों में आकर खड़ा हो जाना चाहिए तथा प्रज्ञावतार के सहयोगी बनकर उनके कार्य को पूरा...View More
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स्वाध्याय और सदविचार


मैले कपड़े को साफ करने के लिए जो उपयोगिता साबुन की है वही मन पर चढ़े हुए मैलों को शुद्ध करने के लिए स्वाध्याय की है। मनुष्य के पास सर्वोत्तम विशेषता उसकी बुद्धि की ही है और इन विचारों का...View More
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कर्मफल और ईश्वर


विचार बीज हैं और कार्य उसका फल। किसान की बीज बोने की प्रक्रिया ही कालान्तर में धान्य राशि के रूप में प्रकट होती है। संसार को फलता- फूलता सुखी और संतुष्ट देखना हो तो उसका एकमात्र उपाय यही है कि जनता को...View More
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धर्म और विज्ञान


वृद्ध जटायु रावण को परास्त करने में समर्थ न था, तो भी उसने अनीति होते देख कर चुप बैठना उचित न समझा, भिड़ गया। इसमें उसे प्राण त्यागने पड़े पर हारने पर भी वह विजयी से भी अधिक श्रेयाधिकारी बन View More
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मानवीय गरिमा


महर्षि अरविन्द कह गये हैं कि ‘‘अतिमानसिक दिव्यता नीचे आकर मानव- प्रकृति का सामूहिक रूपान्तरण करना चाहती है।’’
यही बात परमपूज्य गुरुदेव ने अपने शब्दों में इस प्रकार कही है- ‘‘इन दिनों मनुष्य का भाग्य और भविष्य नये सिरे से लिखा और गढ़ा जा रहा है। ऐसा विलक्षण समय कभी हजारों लाखों वर्षों बाद आता है।’’ इन्हें चूक जाने वाले सदा पछताते रहते हैं और जो उसका सदुपयोग कर लेते हैं, वे अपने आपको सदा- सर्वदा के लिए अजर- अमर...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


महर्षि अरविन्द कह गये हैं कि ‘‘अतिमानसिक दिव्यता नीचे आकर मानव- प्रकृति का सामूहिक रूपान्तरण करना चाहती है।’’
यही बात परमपूज्य गुरुदेव ने अपने शब्दों में इस प्रकार कही है- ‘‘इन दिनों मनुष्य का भाग्य और भविष्य नये सिरे से लिखा और गढ़ा जा रहा है। ऐसा विलक्षण समय कभी हजारों लाखों वर्षों बाद आता है।’’ इन्हें चूक जाने वाले सदा पछताते रहते हैं और जो उसका सदुपयोग कर लेते हैं, वे अपने आपको सदा- सर्वदा के लिए अजर- अमर...View More
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भारतीय संस्कृति


‘‘पीला कपड़ा आप उतारना मत। यह हमारी शान है, हमारी इज्जत है। यह हमारी हर तरह की साधु और ब्राह्मण की परम्परा की निशानी है, कुल की निशानी है। पीले कपड़े पहनकर जहाँ भी जायेंगे लोगों को मालूम पड़ेगा कि ये मिशन के आदमी हैं, जो संतों की परम्परा को जिन्दा रखने के लिए कमर बाँधकर खड़े हो गये। जो ब्राह्मण की परम्परा को जिन्दा रखने के लिए कमर कसकर खड़े हो गये हैं। ऋषियों की निष्ठा को ऊँचा उठाने...View More
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युग निर्माण योजना


‘‘पीला कपड़ा आप उतारना मत। यह हमारी शान है, हमारी इज्जत है। यह हमारी हर तरह की साधु और ब्राह्मण की परम्परा की निशानी है, कुल की निशानी है। पीले कपड़े पहनकर जहाँ भी जायेंगे लोगों को मालूम पड़ेगा कि ये मिशन के आदमी हैं, जो संतों की परम्परा को जिन्दा रखने के लिए कमर बाँधकर खड़े हो गये। जो ब्राह्मण की परम्परा को जिन्दा रखने के लिए कमर कसकर खड़े हो गये हैं। ऋषियों की निष्ठा को ऊँचा उठाने...View More
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समाज निर्माण


‘‘आज दुनिया में पार्टियाँ तो बहुत हैं, पर किसी के पास कार्यकर्ता नहीं हैं। लेबर सबके पास है, पर समर्पित कार्यकर्ता जो साँचा बनता है व कई को बना देता है अपने जैसा, कहीं भी नहीं है। हमारी यह दिली ख्वाहिश है कि हम अपने पीछे कार्यकर्ता छोड़ कर जाएँ। इन सभी को सही अर्थों में डाई- एक साँचा बनना पड़ेगा तथा वही सबसे मुश्किल काम है। रॉ मटेरियल तो ढेरों कहीं भी मिल सकता है, पर डाई कहीं- कहीं...View More
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युग निर्माण योजना


‘‘आज दुनिया में पार्टियाँ तो बहुत हैं, पर किसी के पास कार्यकर्ता नहीं हैं। लेबर सबके पास है, पर समर्पित कार्यकर्ता जो साँचा बनता है व कई को बना देता है अपने जैसा, कहीं भी नहीं है। हमारी यह दिली ख्वाहिश है कि हम अपने पीछे कार्यकर्ता छोड़ कर जाएँ। इन सभी को सही अर्थों में डाई- एक साँचा बनना पड़ेगा तथा वही सबसे मुश्किल काम है। रॉ मटेरियल तो ढेरों कहीं भी मिल सकता है, पर डाई कहीं- कहीं...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


‘‘गुरुदेव! जब हम आपके सामने नहीं होते, कहीं दूर कार्यक्षेत्र में काम कर रहे होते हैं अथवा अपने- अपने घरों में सो रहे होते हैं, तब भी आपको हमारा ध्यान रहता है?’’ उन्होंने आँख में आँसू लाकर कहा था- ‘‘बेटा! जब तुम सोते हो, मेरा या गायत्री माता का ध्यान करते हो तब मैं तुम्हारी चेतना में प्रवेश कर तुम्हें सुधारता हूँ। तुम्हारी चेतना के कण- कण को बदलता हूँ। शरीर से न रहने पर तो यह काम और अधिक...View More
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युग निर्माण योजना


‘‘गुरुदेव! जब हम आपके सामने नहीं होते, कहीं दूर कार्यक्षेत्र में काम कर रहे होते हैं अथवा अपने- अपने घरों में सो रहे होते हैं, तब भी आपको हमारा ध्यान रहता है?’’ उन्होंने आँख में आँसू लाकर कहा था- ‘‘बेटा! जब तुम सोते हो, मेरा या गायत्री माता का ध्यान करते हो तब मैं तुम्हारी चेतना में प्रवेश कर तुम्हें सुधारता हूँ। तुम्हारी चेतना के कण- कण को बदलता हूँ। शरीर से न रहने पर तो यह काम और अधिक...View More
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मानवीय गरिमा


परम पूज्य गुरुदेव के गुरु प्रेम के आलोक में तनिक हम भी परखें, हमारा शिष्यत्व कैसा है? ध्यान रहे मनुष्य जिसे प्यार करता है, उसके उत्कर्ष एवं सुख के लिए बड़े से बड़ा त्याग और बलिदान करने को तैयार रहता है। यदि अन्तःकरण में गुरुप्रेम की पवित्र ज्योति जल सकी होगी तो अपने शरीर मन, अंतःकरण एवं भौतिक साधनों का अधिकाधिक भाग समाज और संस्कृति की सेवा में लगाने से कदम पीछे नहीं हटेंगे। फिर तो ऐसी हूक उठेगी कि...View More
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भाव संवेदना


परम पूज्य गुरुदेव के गुरु प्रेम के आलोक में तनिक हम भी परखें, हमारा शिष्यत्व कैसा है? ध्यान रहे मनुष्य जिसे प्यार करता है, उसके उत्कर्ष एवं सुख के लिए बड़े से बड़ा त्याग और बलिदान करने को तैयार रहता है। यदि अन्तःकरण में गुरुप्रेम की पवित्र ज्योति जल सकी होगी तो अपने शरीर मन, अंतःकरण एवं भौतिक साधनों का अधिकाधिक भाग समाज और संस्कृति की सेवा में लगाने से कदम पीछे नहीं हटेंगे। फिर तो ऐसी हूक उठेगी कि...View More
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मानवीय गरिमा


जब समुद्र मथा गया था तो उसमें से सबसे पहले विष, फिर वारुणी, उसके बाद अन्य रत्न निकले थे। युग निर्माण के लिए, मूर्छित समाज को जाग्रत करने के लिए भी गायत्री संस्था द्वारा वह अमृत निकालने के लिए समुद्र- मंथन का कार्य हो रहा है, जिसे पीने से यहाँ के निवासी इस देवभूमि को अमरों, भूसुरों की निवास- स्थली प्रत्यक्ष रूप में दिखा सकें।
यह समुद्र- मंथन ठीक प्रकार से चल रहा है या नहीं, इसकी प्रारम्भिक परीक्षा यही...View More
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