Chintan Quotes

शांतिकुंज -21 वीं सदी की गंगोत्री


‘अखण्ड ज्योति’ निर्माण का मिशन लेकर अग्रसर होती है। अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य को इस ओर ध्यान देना होगा। हम अपने मनों को स्वच्छ करें, अपनी मलीनता को बुहारें और अपने समीपवर्ती संबंधित परिचित लोगों को भी वैसा ही...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

युग निर्माण योजना


‘अखण्ड ज्योति’ निर्माण का मिशन लेकर अग्रसर होती है। अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य को इस ओर ध्यान देना होगा। हम अपने मनों को स्वच्छ करें, अपनी मलीनता को बुहारें और अपने समीपवर्ती संबंधित परिचित लोगों को भी वैसा ही...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

आध्यात्मिक चिंतन धारा


हमारे सान्निध्य और सत्संग की जिन्हें उपयोगिता प्रतीत होती हो उसे आदि से अंत तक अखण्ड ज्योति पढ़ते रहना चाहिए। एक महीने में हमने जो कुछ सोचा, विचारा, पढ़ा, मनन किया, समझा और चाहा है, उसका सारांश पत्रिका की पंक्तियों में मिल जाएगा। इस...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

युग निर्माण योजना


‘‘अपनी २४ वर्षीय तपश्चर्या के प्रकाश में जहाँ- तहाँ बिखरे पड़े मणि- मुक्तकों को ढूँढ़ - ढूँढ़कर एक सुसम्बद्ध माला के रूप में पिरोया है। आप लोग अपने को पहचानते नहीं, आत्म- विस्मृति की मूर्छना में झपकी लेते रहे हैं, पर हम जानते...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

भारतीय संस्कृति


शिशिर ऋतु में पूज्य गुरुदेव अपने कक्ष से बाहर धूप में बैठते थे। लेखन- शोध से सम्बन्धित कार्यकर्ताओं को वहीं बुलाकर चर्चा करते थे। वहीं निर्देश देते -  देते एकाएक गंभीर हो उठे, बोले- ‘‘लड़को! कहीं तुम्हें अविश्वास तो नहीं होता, मेरे कथन पर...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

युग निर्माण योजना


शिशिर ऋतु में पूज्य गुरुदेव अपने कक्ष से बाहर धूप में बैठते थे। लेखन- शोध से सम्बन्धित कार्यकर्ताओं को वहीं बुलाकर चर्चा करते थे। वहीं निर्देश देते -  देते एकाएक गंभीर हो उठे, बोले- ‘‘लड़को! कहीं तुम्हें अविश्वास तो नहीं होता, मेरे कथन पर...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

मानवीय गरिमा


पूज्यवर ने एक आदर्श आचार संहिता के नाते प्रत्येक परिजन से (शांतिकुंज में) प्रवेश के समय एक ही बात कही थी कि- ‘‘तुम सब यह मानकर चलना कि यह तुम्हारी ओढ़ी हुई गरीबी है। तुम्हारी इस गरीबी में ही तुम्हारी शान...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

शांतिकुंज -21 वीं सदी की गंगोत्री


पूज्यवर ने एक आदर्श आचार संहिता के नाते प्रत्येक परिजन से (शांतिकुंज में) प्रवेश के समय एक ही बात कही थी कि- ‘‘तुम सब यह मानकर चलना कि यह तुम्हारी ओढ़ी हुई गरीबी है। तुम्हारी इस गरीबी में ही तुम्हारी शान...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

सुव्यवस्थित पारिवारिक संबंध


गुरुजी आज भी हममें से प्रत्येक से पूछ रहे हैं- ‘‘अपने विशाल परिवार में कहीं सच्ची आत्मीयता का कितना अंश विद्यमान है, यह जानने की इच्छा होती है ? हमारी आत्मीयता की एक ही कसौटी है कि हमारा दर्द किस- किस की...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

युग निर्माण योजना


गुरुजी आज भी हममें से प्रत्येक से पूछ रहे हैं- ‘‘अपने विशाल परिवार में कहीं सच्ची आत्मीयता का कितना अंश विद्यमान है, यह जानने की इच्छा होती है ? हमारी आत्मीयता की एक ही कसौटी है कि हमारा दर्द किस- किस की...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

युग निर्माण योजना


युगद्रष्टा पूज्य गुरुदेव के शब्दों में घोषित करें तो ‘‘(हमारे मिशन) युग निर्माण योजना के अंतर्गत प्रबल प्रयास यह किया जा रहा है कि समस्त मानव जाति को प्रेम, सौजन्य, सद्भाव, आत्मीयता, समता, ममता आदि उच्च अध्यात्म आदर्शों की आधारशिला पर एकत्रित और...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

गायत्री और यज्ञ


जो सत्यवान नहीं है, जिन्होंने अपना सारा जीवन झूठवान बना करके रखा है, जिसके व्यवहार में झूठ, विचारों में झूठ, नियम में झूठ, रोम- रोम में झूठ भरा पड़ा है। उसका यदि ख्याल हो कि गायत्री मंत्र बोलने के बाद में किसी ऐसी...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

प्रेरक विचार


जो सत्यवान नहीं है, जिन्होंने अपना सारा जीवन झूठवान बना करके रखा है, जिसके व्यवहार में झूठ, विचारों में झूठ, नियम में झूठ, रोम- रोम में झूठ भरा पड़ा है। उसका यदि ख्याल हो कि गायत्री मंत्र बोलने के बाद में किसी ऐसी...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

सफल सार्थक जीवन


कुशल माली बगीचे में खाद पानी के साथ साथ पौधों की काट- छाँट खर पतवार के निष्कासन की व्यवस्था बनाता है। व्यक्तित्व विकास के लिए विकृतियों का परिशोधन और सत्प्रवृत्तियों की स्थापना की दोहरी माली जैसी ही प्रक्रिया अपनानी होती है।   View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

प्रगति की आकांक्षा


कुशल माली बगीचे में खाद पानी के साथ साथ पौधों की काट- छाँट खर पतवार के निष्कासन की व्यवस्था बनाता है। व्यक्तित्व विकास के लिए विकृतियों का परिशोधन और सत्प्रवृत्तियों की स्थापना की दोहरी माली जैसी ही प्रक्रिया अपनानी होती है।   View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

मानवीय गरिमा


मनीषी इंसान की समस्याओं का समाधान देते हैं, व्यक्ति तैयार करते हैं, समाज बनाते हैं। सुकरात को तैयार करने वाले का नाम अरस्तू है और शिवाजी को तैयार करने वाले का नाम समर्थ गुरु रामदास है। चंद्रगुप्त को तैयार करने वाले का...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

भारतीय संस्कृति


मनीषी इंसान की समस्याओं का समाधान देते हैं, व्यक्ति तैयार करते हैं, समाज बनाते हैं। सुकरात को तैयार करने वाले का नाम अरस्तू है और शिवाजी को तैयार करने वाले का नाम समर्थ गुरु रामदास है। चंद्रगुप्त को तैयार करने वाले का...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

प्रेरक विचार


मनीषी इंसान की समस्याओं का समाधान देते हैं, व्यक्ति तैयार करते हैं, समाज बनाते हैं। सुकरात को तैयार करने वाले का नाम अरस्तू है और शिवाजी को तैयार करने वाले का नाम समर्थ गुरु रामदास है। चंद्रगुप्त को तैयार करने वाले का...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

सफल सार्थक जीवन


लोभ, मोह और अहंकार के तीन भारी पत्थर जिनने सिर पर लाद रखे हैं, उनके लिए जीवन साधना की लम्बी और ऊँची मंजिल पर चल सकना, चल पड़ना असम्भव हो जाता है। भले ही कोई कितना ही पूजा पाठ क्यों न करता...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

आध्यात्मिक चिंतन धारा


लोभ, मोह और अहंकार के तीन भारी पत्थर जिनने सिर पर लाद रखे हैं, उनके लिए जीवन साधना की लम्बी और ऊँची मंजिल पर चल सकना, चल पड़ना असम्भव हो जाता है। भले ही कोई कितना ही पूजा पाठ क्यों न करता...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

प्रेरक विचार


लोभ, मोह और अहंकार के तीन भारी पत्थर जिनने सिर पर लाद रखे हैं, उनके लिए जीवन साधना की लम्बी और ऊँची मंजिल पर चल सकना, चल पड़ना असम्भव हो जाता है। भले ही कोई कितना ही पूजा पाठ क्यों न करता...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

सुव्यवस्थित पारिवारिक संबंध


आत्मसुधार में तपस्वी, परिवार निर्माण में मनस्वी और समाज परिवर्तन में तेजस्वी की भूमिका निबाहें। अनीति के वातावरण में मूकदर्शक बनकर न रहें।
...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

समाज निर्माण


आत्मसुधार में तपस्वी, परिवार निर्माण में मनस्वी और समाज परिवर्तन में तेजस्वी की भूमिका निबाहें। अनीति के वातावरण में मूकदर्शक बनकर न रहें।
...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

आध्यात्मिक चिंतन धारा


संत की यह निशानियाँ हैं कि उसका चरित्र ऊँचा होना चाहिए। भक्त का चरित्र ऊँचा न हुआ तब? तब सभी कथा- कीर्तन, भजन- पूजन, जप- तप, अनुष्ठान बेकार हैं। नहीं साहब, हम तो अखण्ड कीर्तन करते हैं, जागरण करते हैं, जप- तप करते हैं। आप यह सब...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

आध्यात्मिक चिंतन धारा


मित्रो, ब्रह्मवर्चस और ब्रह्मतेजस् वह शक्ति है जो भगवान को अपना भक्त बना लेने के लिए मजबूर कर देती है। यह ब्रह्मतेजस् आता कहाँ से है? चरित्र में से आता है। पूजा चरित्र के लिए है। पूजा से भगवान नहीं मिल सकते। पूजा...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

प्रेरक विचार


योद्धा दूसरों का सिर काटने वाले को नहीं कहते ।। सच्चे शूरवीर वे हैं जो अपनी पशु प्रवृत्तियों को महामानवों के स्तर तक बदलने में अपने प्रचण्ड पराक्रम का परिचय दे सकें।
...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

समाज निर्माण


चरित्रवान् व्यक्ति जब विकसित होता है तब उदार हो जाता है, परमार्थ- परायण हो जाता है, लोकसेवी हो जाता है, जनहितकारी हो जाता है और वह अपनी क्षुद्र स्वार्थ, संकीर्णताओं को कम करके लोकहित में, परमार्थ हित में अपने स्वार्थ को देखना शुरू...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

युग निर्माण योजना


चरित्रवान् व्यक्ति जब विकसित होता है तब उदार हो जाता है, परमार्थ- परायण हो जाता है, लोकसेवी हो जाता है, जनहितकारी हो जाता है और वह अपनी क्षुद्र स्वार्थ, संकीर्णताओं को कम करके लोकहित में, परमार्थ हित में अपने स्वार्थ को देखना शुरू...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

आध्यात्मिक चिंतन धारा


उपासना का मुख्य उद्देश्य है ईश्वर के सान्निध्य को प्राप्त करना। जप, तप, पूजा, अर्चा, ध्यान आदि जो कुछ भी किया जा रहा है, वह सब परमात्मा के लिये ही किया जा रहा है, ऐसा अनुभव किया जाना चाहिए। अनुभव करना चाहिये परमात्मा उसकी...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img

कर्मफल और ईश्वर


उपासना का मुख्य उद्देश्य है ईश्वर के सान्निध्य को प्राप्त करना। जप, तप, पूजा, अर्चा, ध्यान आदि जो कुछ भी किया जा रहा है, वह सब परमात्मा के लिये ही किया जा रहा है, ऐसा अनुभव किया जाना चाहिए। अनुभव करना चाहिये परमात्मा उसकी...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
img