Chintan Quotes

मानवीय गरिमा


आवश्यक नहीं कि हर व्यक्ति को गरीबी या मुसीबत के थपेड़े ही सक्रिय बनावें। प्रश्न दिलचस्पी का है। यदि कार्य की दक्षता को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया जाय और उस आधार पर अपनी प्रतिभा, गरिमा को विकसित करने का लक्ष्य...View More
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भाव संवेदना


हर व्यक्ति में दक्षता के बीज समुचित मात्रा में विद्यमान रहते हैं। प्रश्न इतना भर है कि उनके विकास का प्रयत्न किया गया या नहीं? यदि मनुष्य उनके विकास की आवश्यकता सच्चे मन से, गहरी संवेदना के साथ अनुभव करे तो...View More
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सुव्यवस्थित पारिवारिक संबंध


यह निर्विवाद है कि दूसरों के सहयोग की उपेक्षा करके कोई व्यक्ति प्रगतिशील, सुखी एवं समृद्ध होना तो दूर, ठीक तरह जिंदगी के दिन भी नहीं गुजार सकता, इसलिए प्रत्येक बुद्धिमान् व्यक्ति को इस बात की आवश्यकता अनुभव होती है कि वह...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


यह संसार कुएँ की आवाज की तरह है, जिसमें हमारे ही उच्चारण की प्रतिध्वनि गूँजती है। यह संसार दर्पण की तरह है, जिसमें विभिन्न व्यक्तियों के माध्यम से अपना ही स्वरूप दिखाई पड़ता है। इस संसार के बाजार में कोई सुख- सुविधा अपने...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


अध्यात्मवाद का ढाँचा इस उद्देश्य को लेकर खड़ा किया गया है कि व्यक्ति अपने आप में पवित्र, विवेकी, उदार और संयमी बने। दूसरों से ऐसा मधुर व्यवहार करे जिसकी प्रतिक्रिया लौटकर उसके लिए सुविधा और प्रसन्नता उपस्थित करे। ऐसी विचारणा और गतिविधि...View More
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सफल सार्थक जीवन


हमें अपने गुण, कर्म एवं स्वभाव का परिष्कार करना चाहिए। अपनी विचार पद्धति एवं गतिविधि को सुधारना चाहिए। जिन कारणों से निम्नस्तरीय जीवन बिताने को विवश होना पड़ रहा है उन्हें ढूँढना चाहिए और साहस एवं मनोबलपूर्वक उन सभी कारणों...View More
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समाज निर्माण


हमें अपने गुण, कर्म एवं स्वभाव का परिष्कार करना चाहिए। अपनी विचार पद्धति एवं गतिविधि को सुधारना चाहिए। जिन कारणों से निम्नस्तरीय जीवन बिताने को विवश होना पड़ रहा है उन्हें ढूँढना चाहिए और साहस एवं मनोबलपूर्वक उन सभी कारणों...View More
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सफल सार्थक जीवन


हर असफलता के बाद हम दूनी क्रियाशीलता के साथ आगे बढ़ें, यह पुरुषार्थ की चुनौती है। जो एक ही ठोकर में निराश हो बैठा, जिसका आशा दीप एक ही फूँक में बुझ गया। उस दुर्बल मन व्यक्ति ने न जीवन का स्वरूप...View More
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मानवीय गरिमा


हर असफलता के बाद हम दूनी क्रियाशीलता के साथ आगे बढ़ें, यह पुरुषार्थ की चुनौती है। जो एक ही ठोकर में निराश हो बैठा, जिसका आशा दीप एक ही फूँक में बुझ गया। उस दुर्बल मन व्यक्ति ने न जीवन का स्वरूप...View More
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सफल सार्थक जीवन


साहस ही जीवन की विशेषताओं को व्यक्त करने का अवसर देता है। मनुष्य में सभी गुण हों, वह विद्वान् हो, पंडित हो, शक्तिशाली हो, धनवान् हो, सद्गुण संपन्न हो, लेकिन उसमें साहस न हो तो वह अपनी विशेषताओं का, योग्यताओं का कोई उपयोग नहीं...View More
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बाल निर्माण


साहस ही जीवन की विशेषताओं को व्यक्त करने का अवसर देता है। मनुष्य में सभी गुण हों, वह विद्वान् हो, पंडित हो, शक्तिशाली हो, धनवान् हो, सद्गुण संपन्न हो, लेकिन उसमें साहस न हो तो वह अपनी विशेषताओं का, योग्यताओं का कोई उपयोग नहीं...View More
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प्रेरक विचार


साहस ही जीवन की विशेषताओं को व्यक्त करने का अवसर देता है। मनुष्य में सभी गुण हों, वह विद्वान् हो, पंडित हो, शक्तिशाली हो, धनवान् हो, सद्गुण संपन्न हो, लेकिन उसमें साहस न हो तो वह अपनी विशेषताओं का, योग्यताओं का कोई उपयोग नहीं...View More
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प्रेरक विचार


अखण्ड विश्वास के साथ जब कोई आस्तिक भूत, भविष्य और वर्तमान के साथ अपना संपूर्ण जीवन परमात्मा अथवा उसके उद्देश्यों को सौंप देता है, तब उसे अपने जीवन के प्रति किसी प्रकार की चिन्ता करने की आवश्यकता नहीं रहती। तब भी यदि...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


बुरे आदमी बुराई के सक्रिय, सजीव प्रचारक होते हैं। वे अपने आचरणों द्वारा बुराइयों की शिक्षा लोगों को देते हैं। उनकी कथनी और करनी एक होती है। जहाँ भी ऐसा सामंजस्य होगा उसका प्रभाव अवश्य पड़ेगा। हममें से कुछ लोग धर्म प्रचार का...View More
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स्वाध्याय और सदविचार


बुरे आदमी बुराई के सक्रिय, सजीव प्रचारक होते हैं। वे अपने आचरणों द्वारा बुराइयों की शिक्षा लोगों को देते हैं। उनकी कथनी और करनी एक होती है। जहाँ भी ऐसा सामंजस्य होगा उसका प्रभाव अवश्य पड़ेगा। हममें से कुछ लोग धर्म प्रचार का...View More
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कर्मफल और ईश्वर


एक ओर जहाँ मनुष्य अपने को दयालु, क्षमाशील, करुण एवं पर- दुःखकातर होने का दावा कर रहा है, अपने को धर्मज्ञाता, अहिंसक तथा सहानुभूति संपन्न बतला रहा है, वहीं दूसरी ओर पशुओं को मारकर खा रहा है, खाल खींच रहा है, देवताओं के...View More
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मानवीय गरिमा


पर- दोष दर्शन की दुर्बलता त्यागकर आत्म- दोष दर्शन का साहस विकसित कीजिए। जब दृष्टि देखने में समर्थ है तो वह गुण भी देखेगी और दोष भी। गुण औरों के और दोष अपने देखिए। जीवन में गुणों का विकास करने का यही तरीका...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


पर- दोष दर्शन की दुर्बलता त्यागकर आत्म- दोष दर्शन का साहस विकसित कीजिए। जब दृष्टि देखने में समर्थ है तो वह गुण भी देखेगी और दोष भी। गुण औरों के और दोष अपने देखिए। जीवन में गुणों का विकास करने का यही तरीका...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


आत्मा की प्यास बुझाने के लिए,अंतःकरण को पवित्र करने के लिए, आत्म- बल बढ़ाने के लिए प्रेम साधना की अनिवार्य आवश्यकता है। रूखा, नीरस, एकाकी, स्वार्थी मनुष्य कितना ही वैभव संपन्न क्यों न हो, अध्यात्म की दृष्टि से उसे नर- पशु ही कहा जाएगा।...View More
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सुव्यवस्थित पारिवारिक संबंध


अपने को अपने तक ही सीमित रखने की नीति से मनुष्य एक बहुत बड़े लाभ से वंचित हो जाता है, वह है दूसरों की सहानुभूति खो बैठना।
स्वार्थी व्यक्ति यों किसी का कुछ प्रत्यक्ष बिगाड़ नहीं करता, किन्तु अपने लिए...View More
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समाज निर्माण


अपने को अपने तक ही सीमित रखने की नीति से मनुष्य एक बहुत बड़े लाभ से वंचित हो जाता है, वह है दूसरों की सहानुभूति खो बैठना।
स्वार्थी व्यक्ति यों किसी का कुछ प्रत्यक्ष बिगाड़ नहीं करता, किन्तु अपने लिए...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


आध्यात्मिक जीवन अपनाने का अर्थ है- असत् से सत् की ओर जाना। प्रेम और न्याय का आदर करना। निकृष्ट जीवन से उत्कृष्ट जीवन की ओर बढ़ना। इस प्रकार का आध्यात्मिक जीवन अपनाये बिना मनुष्य वास्तविक सुख- शान्ति नहीं पा सकता।
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


मौन मानसिक बहिष्कार खुले बहिष्कार से कहीं अधिक भयानक होता है। खुले बहिष्कार में मनुष्य को अपनी स्थिति तथा उनसे होने वाली हानियों का ज्ञान रहता है, जिससे उसको अपने सुधार की प्रेरणा मिलती रहती है और आगे- पीछे वह अपना सुधार...View More
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समय का सदुपयोग


काम को कल के लिए टालते रहना और आज का दिन आलस्य में बिताना एक बहुत बड़ी भूल है। कई बार तो वह कल कभी आता ही नहीं। रोज कल करने की आदत पड़ जाती है और कितने ही ऐसे महत्त्वपूर्ण...View More
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समय का सदुपयोग


दुष्कर्म करना हो तो उसे करने से पहले कितनी ही बार विचारों और उसे आज की अपेक्षा कल- परसों पर छोड़ो, किन्तु यदि कुछ शुभ करना हो तो पहली ही भावना तरंग को कार्यान्वित होने दो। कल वाले काम को आज...View More
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भाव संवेदना


दुष्कर्म करना हो तो उसे करने से पहले कितनी ही बार विचारों और उसे आज की अपेक्षा कल- परसों पर छोड़ो, किन्तु यदि कुछ शुभ करना हो तो पहली ही भावना तरंग को कार्यान्वित होने दो। कल वाले काम को आज...View More
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सफल सार्थक जीवन


मानवीय जिन्दगी तो वास्तव में यह है कि लोग देखते ही खुश हो जाएँ, मिलते ही स्वागत करें, बात करने में आनंद अनुभव करें और संपर्क से तृप्त न हों। एक बार मिले पर दुबारा मिलने के लिए लालायित रहें। फिर मिलने...View More
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मानवीय गरिमा


मानवीय जिन्दगी तो वास्तव में यह है कि लोग देखते ही खुश हो जाएँ, मिलते ही स्वागत करें, बात करने में आनंद अनुभव करें और संपर्क से तृप्त न हों। एक बार मिले पर दुबारा मिलने के लिए लालायित रहें। फिर मिलने...View More
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स्वस्थ जीवन


जिस प्रकार बिजली से जीरो पावर का मद्धिम प्रकाश उत्पन्न होता है, उससे सौ किलोवाट का तेज चौंधिया देने वाली रोशनी का बल्ब भी जल सकता है। उसी प्रकार जिन शक्तियों और साधनों से हम अपना रोज का काम चलाते...View More
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प्रेरक विचार


जिस प्रकार बिजली से जीरो पावर का मद्धिम प्रकाश उत्पन्न होता है, उससे सौ किलोवाट का तेज चौंधिया देने वाली रोशनी का बल्ब भी जल सकता है। उसी प्रकार जिन शक्तियों और साधनों से हम अपना रोज का काम चलाते...View More
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