Chintan Quotes

मानवीय गरिमा


हमें अपने बारे में अपनी राय आप निर्धारित करनी चाहिए और उसी को सही तथा वजनदार मानना चाहिए। यदि हम अच्छे हैं और सही राह पर चल रहे हैं तो फिर कोई कारण नहीं कि किसी अजनबी या दूरवर्ती की नासमझी...View More
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मानवीय गरिमा


बहुत लोग जिस गलत बात को कर रहे हैं, इसलिए हमको भी करना चाहिए, इस प्रकार की विचारधारा उन्हीं लोगों की होती है जिनके पास अपनी बुद्धि का सम्बल नहीं होता। पूरी दुनिया के एक ओर हो जाने पर भी असत्य...View More
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समाज निर्माण


विरोध करना लोगों का आज स्वभाव बन गया है। यहाँ पर क्या अच्छे कार्य और क्या बुरे, विरोध सबका ही किया जाता है, बल्कि वास्तव में देखा जाय तो पता चलेगा कि बुराई से अधिक भलाई को विरोध का सामना...View More
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सफल सार्थक जीवन


बहुधा देखा जाता है कि जो जितना अधिक चिंतित और अशान्त रहता है वह और अधिक विपत्ति में फँसता है। इसके विपरीत जो शान्त चित्त, संतुलित मन और स्थिर बुद्धि से कठिनाइयों का सामना करता है, वे उसका कुछ भी बिगाड़...View More
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प्रेरक विचार


बहुधा देखा जाता है कि जो जितना अधिक चिंतित और अशान्त रहता है वह और अधिक विपत्ति में फँसता है। इसके विपरीत जो शान्त चित्त, संतुलित मन और स्थिर बुद्धि से कठिनाइयों का सामना करता है, वे उसका कुछ भी बिगाड़...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


परमार्थ मार्ग पर चलने वालों की आमतौर से दुनियादार लोग हँसी उड़ाते हैं, किन्तु जो कुमार्ग पर चल रहे हैं, उन्हें सहन करते रहते हैं। ऐसे अविवेकी लोगों के उपहास अथवा समर्थन का कोई मूल्य नहीं। मूल्य विवेक और सत्य का है। अध्यात्मवादी...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


जो लोग अध्यात्म का अर्थ केवल पूजा- पाठ, कथा- वार्ता, उपवास- व्रत, तीर्थयात्रा, कर्मकाण्ड आदि को समझते हैं, वे गलती पर हैं। ये बातें अध्यात्म भावना उत्पन्न करने में सहायक हो सकती हैं, पर इनको स्वयं अध्यात्म नहीं कहा जा सकता। अध्यात्म तो तभी समझा...View More
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प्रेरक विचार


भाग्यवादी ऐसे पंगु की तरह हैं, जो अपने पाँवों पर नहीं, दूसरों के कंधों पर चलते हैं। जब तक दूसरे बुद्धिमान् व्यक्ति उसे उठाये रहते हैं, तब तक तो वह किसी प्रकार चलता रहता है। दूसरों का आधार हटते ही वह गिरकर नष्ट...View More
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सफल सार्थक जीवन


मानव जीवन उन्नति और प्रगति का अवसर है। इसका उपयोग कर मनुष्य किसी भी दिशा में कितनी ही उन्नति कर सकता है, किन्तु इस उन्नति का आधार एकमात्र श्रम और पुरुषार्थ ही है। ऐसा पुरुषार्थ जो कर्मयोग के भाव से प्रेरित और...View More
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कर्मफल और ईश्वर


मानव जीवन उन्नति और प्रगति का अवसर है। इसका उपयोग कर मनुष्य किसी भी दिशा में कितनी ही उन्नति कर सकता है, किन्तु इस उन्नति का आधार एकमात्र श्रम और पुरुषार्थ ही है। ऐसा पुरुषार्थ जो कर्मयोग के भाव से प्रेरित और...View More
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सफल सार्थक जीवन


अपने आपको सुधारने का प्रयत्न करना, अपने दृष्टिकोण में गहराई तक समाई हुई भ्रान्तियों का निराकरण करना मानव जीवन का सबसे बड़ा पुरुषार्थ है। हमें यह न केवल करना ही चाहिए, वरन् सबसे पहले अधिक इसी पर ध्यान देना चाहिए। अपना...View More
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भाव संवेदना


प्रेम की उपलब्धि परमात्मा की उपलब्धि मानी गई है। प्रेम परमात्मा का भावनात्मक स्वरूप है जिसे अपने अंतर में सहज ही अनुभव किया जा सकता है। प्रेम प्राप्ति परमात्मा प्राप्ति का सबसे सरल मार्ग है। परमात्मा को पाने के अन्य सभी...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


एकाग्रता सिद्ध करने का सबसे अच्छा उपाय यह है कि अपने मन को संसार की ऐसी बातों से दूर रखा जाए जिनसे बेकार की उलझनें और समस्याएँ पैदा हों। उसे केवल ऐसी बातों और विचारों तक ही सीमित रखा जाए जिनसे...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


हम जितने ही कुशल विचार शिल्पी होंगे, हमारी आत्मा का निर्माण उतना ही सुन्दर और स्थायी होगा। अपनी आत्मा का साक्षात्कार भी हम विचारों के द्वारा ही कर सकते हैं। विचारों के आदर्श में ही आत्मा का रूप प्रतिबिम्बित होता है...View More
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सफल सार्थक जीवन


अपने व्यक्तित्व को सीमित करने का नाम स्वार्थ और विकसित करने का नाम परमार्थ है। सीमित प्राण दुर्बल होता है, पर जैसे- जैसे उसका अहम् विस्तृत होता जाता है, वैसे ही आंतरिक बलिष्ठता बढ़ती चली जाती है। प्राण शक्ति का विस्तार सुख- दुःख...View More
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मानवीय गरिमा


दूसरों की अच्छाइयों को खोजने, उनको देख- देखकर प्रसन्न होने और उनकी सराहना करने का स्वभाव यदि अपने अंदर विकसित कर लिया जाये तो आज दोष दर्शन के कारण जो संसार, जो वस्तु और जो व्यक्ति हमें काँटे की तरह चुभते हैं...View More
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समाज निर्माण


दूसरों की अच्छाइयों को खोजने, उनको देख- देखकर प्रसन्न होने और उनकी सराहना करने का स्वभाव यदि अपने अंदर विकसित कर लिया जाये तो आज दोष दर्शन के कारण जो संसार, जो वस्तु और जो व्यक्ति हमें काँटे की तरह चुभते हैं...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


श्रद्धा वह प्रकाश है जो आत्मा की, सत्य की प्राप्ति के लिए बनाये गये मार्ग को दिखाता रहता है। जब कभी मनुष्य एक क्षण के लिए भी लौकिक चमक- दमक, कामिनी और कंचन के लिए मोहग्रस्त होता है तो माता की...View More
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सफल सार्थक जीवन


सच्चा भक्त साहसी और शूरवीर होता है। वह प्रलोभनों एवं भय के आगे झुकता नहीं। जो उचित है, जो सत्य है, उसी का समर्थन करता है, उसी पर दृढ़ बना रहता है और उसी को अपनाने में दुनियादारों की सम्मति की परवाह...View More
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प्रेरक विचार


हर मनुष्य की अपनी एक तौल होती है। इसे आत्म- श्रद्धा कहें या आत्म- गौरव। हर व्यक्ति इसी आंतरिक तौल के आधार पर आचरण करता है, उसी के अनुरूप ही उसे दूसरों से प्रतिष्ठा भी मिलती है और सांसारिक सुखोपभोग भी मिलते हैं।...View More
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सफल सार्थक जीवन


जीवन विकास के लिए यह जरूरी है कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी विशिष्टता को बढ़ाकर ऐसा विकास करे कि वह अपना, आश्रित परिजनों का जीवन उत्कृष्ट श्रेणी का बनाता हुआ मानवीय उद्देश्य की प्राप्ति के लिए अग्रसर होता चले। इस जीवन की...View More
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मानवीय गरिमा


जहाँ वाचालता एक दुर्गुण है, वहाँ मौन एक रहना दैवी गुण है जिसका अपने में विकास करना ही चाहिए, किन्तु इसका यह अर्थ कदापि नहीं है कि मनुष्य बिलकुल बात ही न करे। मौन रहने का मूल मन्तव्य यह है कि...View More
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सफल सार्थक जीवन


उन्नति, विकास एवं प्रगति करना प्रत्येक व्यक्ति का परम पावन कर्तव्य है। यदि वह ऐसा नहीं करेगा तो उसके जीवन में जड़ताजन्य अनेक दोष आ जायेंगे, जो इस प्रसन्न मानव जीवन को एक यातना में बदल देंगे। निराशा, चिंता, क्षोभ, ईर्ष्या, द्वेष आदि...View More
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सफल सार्थक जीवन


किसी भी विशिष्ट व्यक्ति, वस्तु अथवा स्थान का देखना अथवा दिव्यता का दर्शन करना तभी सार्थक होता है, जब उसके गुणों अथवा विशेषताओं को सूक्ष्मता से देखें, उनकी महत्ता को समझें, हृदयंगम करें और जीवन विकास के लिए उनसे प्रेरणा एवं शिक्षा...View More
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कर्मफल और ईश्वर


भलाई के कार्यों में कुछ कमी है तो उतनी कि उसके परिपाक में कुछ समय लगता है। शुभ कर्म का फल समय के गर्भ में जब तक पक नहीं जाता, तब तक उसकी धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। कम स्वादिष्ट, कम उपयोगी...View More
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आध्यात्मिक चिंतन धारा


अंतःकरण में पापकर्म के संकल्प का उदय होते ही आत्मा में एक बेचैनी पैदा होने लगती है। उसका विवेक बार- बार धिक्कारता और भर्त्सना करता है। मनुष्य सुख- चैन की नींद खो देता है। उसकी अंतरात्मा बार- बार पुकार करती है कि तेरा...View More
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कर्मफल और ईश्वर


प्रभु समदर्शी है। वह सबका पिता है। उसे अपने सभी पुत्र समान रूप से प्यारे हैं। वह किसी के बीच भेदभाव नहीं बरतता। सबको समान दृष्टि से देखता है और सब पर समान कृपा रखता है। उसे पक्षपाती कहना उसकी महिमा, गरिमा और...View More
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सफल सार्थक जीवन


यदि आप महत्त्वाकाँक्षी हैं, जीवन में उन्नति एवं विकास का कोई ऊँचा लक्ष्य पाना चाहते हैं, तो प्रगति पथ के इन तीन शत्रुओं- आवेश, असहनशीलता तथा अदूरदर्शिता को निकाल डालिये और प्रतिक्षण सावधान रह कर श्रेय पथ पर आगे बढ़िये। आपकी आकाँक्षाएँ...View More
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युग निर्माण योजना


विचार क्रान्ति- जिसका अर्थ है मनुष्य की आस्था के स्तर को निकृष्टता से विरत कर उत्कृष्टता की ओर अभिमुख करना, आज की यह सबसे बड़ी आवश्यकता है। युग की यही पुकार है। संसार का उज्ज्वल भविष्य इसी प्रक्रिया द्वारा संभव है। इतने...View More
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समाज निर्माण


हम सामाजिक प्राणी हैं। समाज से अलग हमारा कोई अस्तित्व नहीं। समाज उन्नत होगा तो हमारी भी उन्नति होगी, समाज का पतन होगा तो हमारा भी पतन होगा। हम समाज के उत्थान- पतन अथवा सफलता- असफलता से कदापि अछूते नहीं रह सकते। इस प्रकार...View More
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