समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


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श्रम और तितिक्षा से शरीर मजबूत बनता है।


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शील ही नारी की शोभा है।


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बिना परिश्रम का धन किसी के लिए भी उपयोगी नहीं हो सकता।


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जिसके भीतर जितने परिमाण में ईश्वरीय प्रयोजनों में सहयोगी बनने की तड़पन है, वह उतना ही दिव्य आत्मा है।


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ಉದ್ವೇಗ ಚಿಂತೆಗಿಂತ ಮಿಗಿಲಾದ ಬೆಂಕಿಯಿಲ್ಲ, ದ್ವೇಷಗಿಂತ ಮೀಗಿಲಾದ ವಿಷವಿಲ್ಲ, ಕೋಪಕ್ಕಿಂತ ಮೀಗಿಲಾದ ಮೂಳ್ಳು ಇಲ್ಲ ಅಸುಯೆಗಿಂತ ಮಿಗಿಲಾದ ಬಲೆಯಿಲ್ಲ.


ಪಂ. ಶ್ರೀರಾಮ ಶರ್ಮಾ ಆಚಾರ್ಯ


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प्रशंसकों पर ही प्रसन्न न हों। महत्त्व उन्हें भी दें जो सही आलोचना कर सकते हैं।


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मानवता एवं उत्कृष्टता का दूसरा नाम है- आस्तिकता। उपासना इसी का अभ्यास करने के लिए एक महत्त्वपूर्ण विज्ञानसम्मत मानसिक व्यायाम है।


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स्वच्छ मन मानव जीवन की सबसे बड़ी सम्पदा है।


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भगवान् के आदर्शों पर चलने का साहस जो दिखाता है, उनके हितों की रक्षा का ध्यान भगवान् स्वयं रखते हैं।


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वे प्रत्यक्ष देवता हैं, जो कर्तव्य पालन के लिए मर मिटते हैं।


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भाग्यवादी वह है, जो स्वयं में विश्वास नहीं करता।


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