समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
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The proper use of time is the basis of success, so use it wisely.


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व्यक्तिगत, सामाजिक और राजनैतिक क्षेत्र में संव्याप्त अगणित दुष्प्रवृत्तियों के विरुद्ध व्यापक परिमाण में संघर्ष आरम्भ किया जाये। इसलिए हर नागरिक को अनाचार के विरुद्ध आरम्भ किये धर्म युद्ध में भाग लेने के लिए आह्वान करना होगा। किसी समय तलवार चलाने वाले और सिर काटने में अग्रणी लोगों को योद्धा कहा जाता था, अब माप दण्ड बदल गया। चारों ओर संव्याप्त आतंक और अनाचार के विरुद्ध संघर्ष में जो जितना साहस दिखा सके और चोट खा सके उसे उतना बड़ा बहादुर माना जायेगा। उस बहादुरी के ऊपर ही शोषण में विहीन समाज की स्थापना संभव हो सकेगी। दुर्बुद्धि से कुत्सा और कुण्ठा से लड़ सकने में जो लोग समर्थ होंगे उन्हीं का पुरुषार्थ पीड़ित मानवता को त्राण दे सकने का यश संचित कर सकेगा।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
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पढ़ना, ज्ञान के नेत्र खोलने के लिए होता है;  नौकरी के लिए नहीं।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
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जो तुम दूसरों से चाहते हो उसे पहले तुम स्वयं करो।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
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ಆತ್ಮಚಿಂತನೆ ಹಾಗೂ ಆತ್ಮಶೋಧನೆಗಳ ಸಾಧನೆಯೇ ಆತ್ಮಕ್ಕೆ ಪರಮಾತ್ಮನ ಸ್ಥಾನವನ್ನು ತಂದುಕೊಡುತ್ತದೆ.



ಪಂ. ಶ್ರೀರಾಮ ಶರ್ಮಾ ಆಚಾರ್ಯ





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शिक्षक राष्ट्र मंदिर के कुशल शिल्पी हैं।


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ज्योतिबा फुले-  "स्त्री शिक्षा के दरवाजे पुरुषों ने इसलिए बंद कर रखे हैं कि वह मानवीय अधिकारों को समझ न पाए, जैसी स्वतन्त्रता पुरुष लेता है, वैसी ही स्वतन्त्रता यदि स्त्री ले, तो पुरुषों के लिए अलग नियम और स्त्रियों के लिए अलग नियम- यह पक्षपात है।‘‘


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परम्पराओं की तुलना में विवेक को महत्त्व दें।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
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A coward dies several times before death, but the brave one face death only on the date of death.


By Pandit Shriram Sharma Acharya
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विद्यार्थी वह जिसमें ज्ञान की पिपासा हो।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
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विवेक एवं ज्ञान भारतीय संस्कृति की आत्मा है।


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