समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
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सबसे बड़ी कोई सहायता है तो वह है कठिनाई के वक्त किसी की मदद करना।

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वे माता- पिता धन्य हैं, जो अपनी संतान के लिए उत्तम पुस्तकों का एक संग्रह छोड़ जाते हैं।


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गुण ही नारी का सच्चा आभूषण है।


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इस युग की सबसे बड़ी शक्ति शस्त्र नहीं, सद्विचार है।


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नारी शिक्षा की उपेक्षा करना उसे मानसिक दृष्टि से अपंग बना देने जैसा अन्याय है।


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शिक्षक नई पीढ़ी के निर्माता होते हैं।


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देव वे हैं, जो अपने अधिकारों को भूलकर कर्तव्यपालन का ही स्मरण रखते हैं। परमार्थ और परोपकार में अपनी शक्तियों का अधिक त्याग करते हैं और इसी में अपना सच्चा स्वार्थ मानते हैं।


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बड़प्पन सादगी, संजीदगी, सज्जनता और सुव्यवस्था में सन्निहित रहता है।


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शरीर भगवान् का मंदिर है, इसमें आत्मा का निरन्तर निवास है।

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चरित्र हमारे अन्तर का दीपक है।


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मनुष्य ऋषियों, तपस्वियों, मनस्वियों और मनीषियों का वंशधर है ।


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