समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

नारी गुण -सौन्दर्य बढ़ाएँ, आभूषण नहीं।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

सौन्दर्य फैशन में नहीं, वरन् हृदय के आदर्श गुणों में है।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

शरीर को देखकर मनुष्य होना पहचाना जाता है और भावना देख कर उसका दैत्य या देवता होना।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

योद्धा दूसरों का सिर काटने वाले को नहीं कहते ।। सच्चे शूरवीर वे हैं जो अपनी पशु प्रवृत्तियों को महामानवों के स्तर तक बदलने में अपने प्रचण्ड पराक्रम का परिचय दे सकें।

By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

सन्मार्ग पर चलना ही आत्मबल बढ़ाने का अमोघ साधन है।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

परोपकार से बढ़कर और निरापद दूसरा कोई धर्म नहीं।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

ऐसे कार्य न करें कि पश्चाताप की आग में जलना पड़े।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

ज्ञान का जितना भाग व्यवहार में लाया जा सके वही सार्थक है, अन्यथा वह गधे पर लदे बोझ के समान है।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

सद्विचार ही स्वर्ग है और कुविचार ही नरक है।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

ईश्वर पाप से बहुत कुढ़ता है और हमारी चौकीदारी के लिए अदृश्य रूप से हर घडी़ साथ रहता है।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

उत्तम ज्ञान और सद्विचार कभी भी नष्ट नहीं होते।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email