समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


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वे माता- पिता धन्य हैं, जो अपनी संतान के लिए उत्तम पुस्तकों का एक संग्रह छोड़ जाते हैं।


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फूलों की तरह हँसते- मुस्कराते जीवन व्यतीत करो।


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परोपकार ही ईश्वर की सच्ची पूजा है।



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ईश्वर प्रेम का मापदण्ड एक ही है -आदर्शों से घनिष्ठ रूप से जुड़ जाना।


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आदर्शों के साथ लिपटी हुई आत्मीयता ही भक्ति भावना है।


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कर्मयोग ही संसार में ऊँचा उठने का श्रेष्ठ साधन है।


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नैतिक अनाचार, राजनैतिक भ्रष्टाचार एवं सामाजिक कुरीतियों के जंजाल से निकलें।


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कर्मणि त्यज्यते प्रज्ञा।
अर्थात्- कर्म में ही मनुष्यों की प्रज्ञा की अभिव्यक्ति होती है।


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सबसे बड़ा दीन- दुर्बल वह है, जिसका अपने ऊपर नियंत्रण नहीं।


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दो याद रखने योग्य हैं - एक कर्तव्य और दूसरा मरण।


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अध्यात्म का अर्थ है- अपने आपको सही करना।



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