समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
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खुशामद बड़े- बड़ों को ले डूबती है।


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शान्तिकुंज एक क्रान्तिकारी विश्वविद्यालय है। अनौचित्य की नींव हिला देने वाली यह संस्था प्रभात पर्व की एक नवोदित किरण है।


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अपने आत्मस्वरूप को जानना ही परमात्मा का स्मरण करना है


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कर्मयोग का अर्थ है - लोकमंगल के उच्च स्तरीय प्रयोजनों में पुरुषार्थ को नियोजित किए रहना।


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पराये धन के प्रति लोभ पैदा करना अपनी हानि करना है।


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भाग्य पर नहीं, चरित्र पर निर्भर रहो।


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नारी परिवार का हृदय है। परिवार का संपूर्ण अस्तित्व तथा वातावरण नारी पर- सुगृहिणी पर निर्भर करता है।


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भाग्य बदलने की एकमात्र शर्त है- उन्नति के लिए सच्चा और निरन्तर संघर्ष।


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जमाना तब बदलेगा, जब हम स्वयं बदलेंगे।


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नारी शिक्षा की उपेक्षा करना उसे मानसिक दृष्टि से अपंग बना देने जैसा अन्याय है।


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Mind is not made of stone or glass, which cannot be changed. Mind can be reformed as well as changed by making an effort.


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