समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


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मनुष्य कर्म करने में स्वतंत्र है; परन्तु इनके परिणामों में चुनाव की कोई सुविधा नहीं।


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गृहस्थ एक तपोवन है, जिसमें संयम, सेवा, त्याग और सहिष्णुता की साधना करनी पड़ती है।


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अपनी वाक्शक्ति का दुरुपयोग न करें।


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नारी के हैं रूप अनेक, ब्रह्मा विष्णु और महेश।


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There is no greater virtue than to inspire someone to righteous action.

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भगवान् से प्रार्थना करने वालों को उनके कार्यों में सहयोग देना भी आवश्यक है।


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दर्शन को बनाने वाली माँ का नाम है- ‘मनीषा’


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जो अपने बारे में तुच्छता के विचार रखता है वह सचमुच तुच्छ है और जिसका विश्वास है कि मैं महान हूँ, सचमुच वही महान् है।


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मनुष्य कर्म करने में स्वतंत्र है, परन्तु इनके परिणामों में चुनावों की कोई सुविधा नहीं।


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आत्म परिष्कार की साधना का नाम ही अध्यात्म है।


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आशावादी हर कठिनाइयों में भी अवसर देखता है।


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