समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

ప్రతి క్షణం కార్య నిమగ్నుడవైతే శీలం నిర్మాణమవుతుంది.

By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

नारी का गुण लज्जा, भय या संकोच नहीं; बल्कि विनय, आत्म- श्रद्धा, निर्भयता, शुचिता और आत्म सौन्दर्य है।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

भावना से कर्तव्य बड़ा होता है।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

He alone is the true follower of the path of self-realization who thinks that he should do something to serve others.


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

परिवार सद्गुणों को विकसित करने की एक प्रयोगशाला है। उसका सही निर्धारण एवं सुसंचालन किया जा सके, तो निश्चय ही उस परिवार में से सुयोग्य- सुशिक्षित नागरिक एवं महामानव निकलते हैं।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

शुभ कार्य के लिए हर दिन शुभ है।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

मनुष्य के दैनिक आवश्यक कर्तव्यों में ईश्वर उपासना सबसे प्रमुख है।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

ಯಾರು ತನ್ನ ಶೀರವನ್ನು ತಂಪಾಗಿ, ರಕ್ತವನ್ನು ಬೀಸಿಯಾಗಿ ಹೃದಯಲ್ಲಿ ಪ್ರೇಮವನ್ನು ತುಂಬಿಕೊಂಡು ಜೀವನವನ್ನು ಸರಿಯಾಗಿಸಿಕೊಳ್ಳಲು ಬಯಸುವನೋ ಅವನೇ ಸಾರ್ಥಕ ಜೀವಿಯಾಗಿರುತ್ತಾನೆ.


ಪಂ. ಶ್ರೀರಾಮ ಶರ್ಮಾ ಆಚಾರ್ಯ


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

अपने जीवन से प्यार करो तो वह तुम्हें प्यार करेगा।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

विचारों के परिमार्जन के लिए स्वाध्याय आवश्यक है।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

जिस भी समुदाय में स्वाभिमानी, सुसंस्कृत, श्रमशील नारी विद्यमान होती है, वह समाज निश्चित ही प्रगति करता है।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email