समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
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प्रतिकूल परिस्थिति में भी हम अधीर न हों।


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आत्मा के निवास मंदिर शरीर को अपनी बुरी आदतों से नष्ट भ्रष्ट करना पाप है।


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वाणी नहीं, आचरण एवं व्यक्तित्व ही प्रभावशाली उपदेश है।


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बड़प्पन सादगी और शालीनता में है।


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चरित्रवान् व्यक्ति ही सच्चे अर्थों में भगवद् भक्त हैं।


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Sin brings along with it disease, distress, downfall and difficulties.


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वाक्शक्ति का दुरुपयोग न करें।


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तुम्हें दया और सेवा करने के लिए भेजा गया है। सताने और छीनने के लिए नहीं।


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सबसे बड़ी कोई सहायता है तो वह है कठिनाई के वक्त किसी की मदद करना।

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जैसा मनुष्य स्वयं ही जैसा होगा, वैसा ही बाहर देखेगा।


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The Sun is our great teacher. Without respite it tirelessly performs its task of serving the world by giving it light.


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