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  • समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरों को पीड़ा न देना ही मानव धर्म है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो टूटे को बनाना और रूठे को मनाना जानता है, वही बुद्धिमान् है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संयम के बिना जीवन का विकास नहीं होता। जीवन के सितार पर हृदयमोहक मधुर संगीत उसी समय गूँजता है, जब उसके तार नियम तथा संयम से बँधे होते है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो ज्ञान समय पर काम न आए वह व्यर्थ है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पीड़ित मानवता की सेवा ही सच्ची आराधना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    युग परिवर्तन की संभावना हमारी कल्पना नहीं, समय की प्रेरणा है। क्योंकि इसके बिना न व्यक्ति का कल्याण है और न विश्व का उद्धार संभव है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कामना करने वाले कभी भक्त नहीं हो सकते। भक्त शब्द के साथ में भगवान् की इच्छाएँ पूरी करने की बात जुडी़ रहती है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वही सच्चा भक्त है, जो दूसरों के कष्ट में सहभागी बनता है और अपना सुख औरों को बाँटता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान की परिपक्वता कर्म से होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संसार का हर प्राणी अपने आत्म- कल्याण के लिए आप उत्तरदायी है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन जीना, आदर्श और उद्देश्य के लिए संग्राम करना है। जीवन जागरण की धारा है। जब तक जियो प्रतिज्ञाबद्ध जियो। अपने जीवन का सच्चा उद्देश्य तलाश करो और जब एक बार उसे जान लो तो उसे प्राप्त करने के लिए जुट जाओ। जियो और विजय प्राप्त करो। (अखण्ड ज्योति-१९४०, अक्टूबर १)


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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