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अभी नहीं तो कभी नहीं

 जर्जर मकान आये दिन गिरते रहते हैं, पर भवन कितने ही विशालकाय हो, यदि आधार स्तम्भ सुदृढ़ हो तो वे भयंकर भूचालों में भी अविचलित खड़े रहते हैं। तूफान हो, झंझावात हों, समुद्र गहरा हो, तो भी कुशल माँझी नाव किनारे पहुँचा देते हैं। युद्ध कितना ही भीषण हो, अनेक मोर्चों पर लड़ा जा रहा हो, तो भी साहसी और सूझबूझ वाले सेनापति विजयी होते हैं, यश प्राप्त करते हैं। कुल चौदह किन्तु मूर्धन्य व्यक्तियों से बनी निहत्थी काँग्रेस ने...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

हमारी कितनी रातें सिसकते बीती हैं, कितनी बार हम बालकों की तरह बिलख- बिलख कर, फूट- फूट कर रोये हैं। इसे कोई कहाँ जानता है? लोग हमें संत, सिद्ध, ज्ञानी मानते हैं। कोई लेखक, विद्वान, वक्ता, नेता समझते हैं, पर किसने हमारा अन्तःकरण खोलकर पढ़ा, समझा है? कोई...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

जिन चरणों में अपने आप को समर्पित किया, उनके बिना जीवन का एक- एक क्षण पीड़ा के पहाड़ की तरह बीत रहा है ।। जिस दिन उनके पास आई, उस दिन का पहला पाठ था पीड़ित मानवता की सेवा और देवसंस्कृति का...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

अस्सी वर्ष जी गई लम्बी सोद्देश्य शरीर यात्रा पूरी हुई ।। इस अवधि में परमात्मा को हर पल अपने हृदय और अंतःकरण में प्रतिष्ठित मान एक- एक क्षण का पूरा उपयोग किया है ।। शरीर अब विद्रोह कर रहा है ।। यूँ...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

युगनिर्माण अभियान को युगऋषि ने त्रिवेणी संगम कहा है। इसे तीन धाराएँ मिलकर स्वरूप देती हैं।

ईश्वर- यह योजना ईश्वर की है, इसलिए उसके लिए शक्ति- अनुदान भी सब को उसी से प्राप्त होते हैं। फसल के संदर्भ में यह अनुकूल मौसम...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

क्रान्तिधर्मी साहित्य- युग साहित्य महत्ता :

क्रान्तिधर्मी साहित्य- युग साहित्य नाम से विख्यात यह पुस्तकमाला युगद्रष्टा- युगसृजेता प्रज्ञापुरुष पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा १९८९- ९० में महाप्रयाण के एक वर्ष पूर्व की अवधि में एक ही प्रवाह में लिखी गयी है। प्राय: २०...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

महाकाल के तेवर समझें, दण्ड के नहीं- पारितोषिक के पात्र बनें

साहस ने हमें पुकारा है। समय ने, युग ने, कर्तव्य ने, उत्तरदायित्व ने, विवेक ने, पौरुष ने हमें पुकारा है। यह पुकार अनसुनी न की जा सकेगी। आत्मनिर्माण के लिए, नव निर्माण...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

विचार क्रांति के बीजों से क्रांति की केसरिया फसल लहलहा उठे-

(जीवट है, तो महाक्रान्ति की चिनगारी को आग और आग को दावानल बनने में सहयोग दें)

युग बदलने के लिए बहुत बड़े काम करने पड़ेंगे; परन्तु यह काम नौकरों से नहीं...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

गायत्री परिवार/प्रज्ञा परिवार/युग निर्माण परिवार ::
 युग निर्माण योजना को सफल एवं विश्वव्यापी बनाने के लिए पारिवारिक अनुशासन में गठित सृजनशील संगठन, जिसे गायत्री उपासना के आधार पर गायत्री परिवार, व्यक्तित्व परिष्कार के लिए आवश्यक दूरदर्शी विवेकशीलता के आधार...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

तुम्हीं को कुम्हार व तुम्हीं को चाक बनना है। हमने तो अनगढ़ सोना ढेरों लाकर रख दिया है, तुम्हीं को साँचा बनाकर सही सिक्के ढालना है। साँचा सही होगा तो सिक्के भी ठीक आकार के बनेंगे। आज दुनिया में पार्टियाँ तो बहुत...View More