Share on Google+ Email
उत्कृष्टता- आदर्शवादिता का समन्वय मात्र पूजा करने से नहीं, आत्मा को परमात्मा के साँचे में ढाल लेने से सम्भव है।



Pandit Shriram Sharma Acharya
Comments

Post your comment