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उपासना का शब्दार्थ है- समीप बैठना। ईश्वर और जीव के बीच रहने वाली दूरी को समाप्त करके जिस प्रक्रिया से निकटता बनती हो, उसे उपासना कहते है।


Pandit Shriram Sharma Acharya
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