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जो व्यक्ति सन्ध्या के डूबते हुए सूर्य को देखकर दुःखी होता है और प्रातः के सुनहरे अरुणोदय पर विश्वास नहीं करता, वह नास्तिक है।


Pandit Shriram Sharma Acharya
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