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सच्चा आनन्द उसे मिलता है, जिसने अपने मन को जीत लिया। मन को जीतने का अर्थ है- उसे कुमार्ग पर चलने से मोड़कर सन्मार्ग में प्रवृत्त कर देना। मन के सन्मार्ग पर चलने की पहचान है- गुण, कर्म, स्वभाव में सहिष्णुता की वृद्धि होना, सद्विचारों, सद्भावनाओं, सत्प्रवृत्तियों एवं सत्कर्मों का बढ़ना।


Pandit Shriram Sharma Acharya
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