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    तुम्हीं को कुम्हार व तुम्हीं को चाक बनना है। हमने तो अनगढ़ सोना ढेरों लाकर रख दिया है, तुम्हीं को साँचा बनाकर सही सिक्के ढालना है। साँचा सही होगा तो सिक्के भी ठीक आकार के बनेंगे। आज दुनिया में पार्टियाँ तो बहुत हैं, पर किसी के पास कार्यकर्ता नहीं हैं‘लेबर’ सबके पास हैं, पर समर्पित कार्यकर्ता जो साँचा बनता है व कई को बना देता है अपने जैसा, कहीं भी नहीं है। हमारी यह दिली ख्वाहिश है कि हम अपने पीछे समर्पित कार्यकर्ता छोडक़र जाएँ। इन सभी को सही अर्थों में ‘डाई’ एक साँचा बनना पड़ेगा तथा वही सबसे मुश्किल काम है। रॉ मेटेरियल तो ढेरों कहीं भी मिल सकता है पर ‘डाई’ कहीं- कहीं मिल पाती है। श्रेष्ठ कार्यकर्ता श्रेष्ठतम ‘डाई’ बनता है। तुम सबसे अपेक्षा है कि अपने गुरु की तरह की एक श्रेष्ठ साँचा बनोगे।
    - अमृतवाणी वाङ्मय ६८ पृष्ठ १.१४
     
    मुद्दतों से देव परम्पराएँ अवरुद्ध हुई पड़ीं हैं। अब हमें अपना सारा साहस समेट कर तृष्णा और वासना के कीचड़ से बाहर निकलना होगा और वाचालता एवं विडम्बना से नहीं, अपने कृत्यों से अपनी उत्कृष्टता का प्रमाण देना होगा। हमारा उदाहरण ही दूसरे अनेक लोगों को अनुकरण का साहस प्रदान करेगा।....सार्थक और प्रभावी उपदेश वह है जो वाणी से नहीं, अपने आचरण से प्रस्तुत किया जाता है।

    वाणी और लेखनी के माध्यम से लोगों को किसी बात की, अध्यात्मवाद की भी जानकारी कराई जा सकती है। इससे अधिक भाषणों का कोई उपयोग नहीं। दूसरों को यदि कुछ सिखाना हो, तो उसका एक मात्र तरीका अपना उदाहरण प्रस्तुत करना है। यही ठोस, वास्तविक और प्रभावशाली पद्धति है।
     - शांतिकुंज प्रज्ञा सद्वाक्यपट
     
    पढऩे योग्य लिखा जाए, इससे लाख गुना बेहतर है कि लिखने योग्य किया जाए।....अभ्यास की एक बूँद सिद्धांतों, सलाहों और अच्छे संकल्पों के समुद्र से कहीं अच्छी है।
    - शांतिकुंज विद्यापीठ सद्वाक्यपट
     
    अपने अनन्य आत्मीय प्रज्ञा परिजनों में से प्रत्येक के नाम हमारी यही वसीयत और विरासत है कि हमारे जीवन से कुछ सीखें। कदमों की यथार्थता खोजें, सफलता जाँचें और जिससे जितना बन पड़े अनुकरण का, अनुगमन का प्रयास करें। यह नफे का सौदा है, घाटे का नहीं।
    - हमारी वसीयत और विरासत


    Pandit Shriram Sharma Acharya
    Comments

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    MOHAN LAL KARSH
    2018-03-24 09:26:17
    sat sat pranm guruvar
    MOHAN LAL KARSH
    2018-03-24 09:25:31
    Pranam Guruvar