• हमारा जीवन कैसा हो ?
  • अपने अंग अवयवों से !
  • हमारा युग निर्माण सत्संकल्प
  • Solemn Pledge ,Yug Nirman Satsankalpa
  • क्रान्तिधर्मी साहित्य महत्ता
  • युग निर्माण योजना- एक दृष्टि में
  • हमारे जीवन से कुछ सीखे-1
  • हमारे जीवन से कुछ सीख-2
  • या तो अभी या कभी नहीं
  • विचार क्रांति के बीजों से
  • महाकाल के तेवर समझें
  • हमारे जीवन से कुछ सीखें
  • त्रिवेणी संगम
  • अंतिम संदेश-परम पूज्य गुरुदेव
  • अंतिम संदेश- वंदनीया माताजी
  • या तो अभी या कभी नहीं
  • अंतिम संदेश- वंदनीया माताजी
    Share on Google+ Email

    जिन चरणों में अपने आप को समर्पित किया, उनके बिना जीवन का एक- एक क्षण पीड़ा के पहाड़ की तरह बीत रहा है ।। जिस दिन उनके पास आई, उस दिन का पहला पाठ था पीड़ित मानवता की सेवा और देवसंस्कृति का पुनरोदय, सो अपने आपको उसी में घुला दिया ।। यद्यपि यह एक असह्य वेदना थी, तथापि महाप्रयाण से पूर्व परम पूज्य गुरुदेव की आज्ञा थी कि अपने उन बालकों की अँगुली पकड़ कर उन्हें मिशन की सेवा के मार्ग पर सफलतापूर्वक आगे बढ़ा दूँ, जिन्हें अगले दिनों उत्तरदायित्व सँभालने हैं ।। पिछले चार वर्षों में मिशन जिस तरह आगे बढ़ा, वह सबके सन्मुख है, जो मैं देख रही हूँ ।। आगे का भविष्य तो इतना उज्ज्वल है, जिसे कल्पनातीत और चमत्कार कहा जा सकता है ।। उसके लिये जिस पुरुषार्थ की आवश्यकता है, हमारे बालक अब उसमें पूर्णतया प्रशिक्षित हो गये है ।।

    शरीरयात्रा अब कठिन हो रही है ।। उनके जाने के पश्चात आज तक एक क्षण भी ऐसा नहीं बीता, जब वे आँखों से ओझल हुए हों ।। घनीभूत पीड़ा अब आँसू रोक नहीं पा रही, सो मुझे उन विराट् तक पहुँचना अनिवार्य हो गया है ।। यह न समझें हम स्वजनों से दूर हो जाएँगे ।। परम पूज्य गुरुदेव के सुख- सुविधाओं के सूक्ष्म एवं कारण सत्ता में विलीन होकर हम अपने आत्मीय कुटुंबियों को अधिक प्यार बाँटेंगें उनकी सुख- सुविधाओं में अधिक सहायक होंगे ।।

    हमारा कार्य अब सारथी का होगा ।। दुष्प्रवृत्तियों से महाभारत का मोर्चा अब पूरी तरह हमारे कर्तव्यनिष्ठ बालक सँभालेंगे ।। सभी क्रिया कलाप न केवल पूर्ववत सम्पन्न होंगे, वरन विश्व के पाँच अरब लोगों के चिंतन, जीवन व्यवहार, दृष्टिकोण में परिवर्तन और मानवीय संवेदना की रक्षा के लिये और अधिक तत्पर होकर कार्य करेंगे ।। हम तब तक रुकेंगे नहीं, जब तक धरती पर स्वर्ग और मनुष्य में देवत्व का अभ्युदय स्पष्ट दृष्टिगोचर न होने लगे ।।


    Pandit Shriram Sharma Acharya
    Comments

    Post your comment