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इन्द्रियाँ किसी को नहीं सताती, वे तो उपयोगी प्रयोजनों के लिये बने हुये साधन मात्र हैं। उच्छृंखल तो मन है। उसी को समेटो ताकि इन्द्रियों द्वारा अपनी उच्छृंखलता के लिए बाधित न करें।


Pandit Shriram Sharma Acharya
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