हमारे जीवन से कुछ सीख-2

तुम्हीं को कुम्हार व तुम्हीं को चाक बनना है। हमने तो अनगढ़ सोना ढेरों लाकर रख दिया है, तुम्हीं को साँचा बनाकर सही सिक्के ढालना है। साँचा सही होगा तो सिक्के भी ठीक आकार के बनेंगे। आज दुनिया में पार्टियाँ तो बहुत हैं, पर किसी के पास कार्यकर्ता नहीं हैं‘लेबर’ सबके पास हैं, पर समर्पित कार्यकर्ता जो साँचा बनता है व कई को बना देता है अपने जैसा, कहीं भी नहीं है। हमारी यह दिली ख्वाहिश है कि हम अपने पीछे समर्पित कार्यकर्ता छोडक़र जाएँ। इन सभी को सही अर्थों में ‘डाई’ एक साँचा बनना पड़ेगा तथा वही सबसे मुश्किल काम है। रॉ मेटेरियल तो ढेरों कहीं भी मिल सकता है पर ‘डाई’ कहीं- कहीं मिल पाती है। श्रेष्ठ कार्यकर्ता श्रेष्ठतम ‘डाई’ बनता है। तुम सबसे अपेक्षा है कि अपने गुरु की तरह की एक श्रेष्ठ साँचा बनोगे।
- अमृतवाणी वाङ्मय ६८ पृष्ठ १.१४
 
मुद्दतों से देव परम्पराएँ अवरुद्ध हुई पड़ीं हैं। अब हमें अपना सारा साहस समेट कर तृष्णा और वासना के कीचड़ से बाहर निकलना होगा और वाचालता एवं विडम्बना से नहीं, अपने कृत्यों से अपनी उत्कृष्टता का प्रमाण देना होगा। हमारा उदाहरण ही दूसरे अनेक लोगों को अनुकरण का साहस प्रदान करेगा।....सार्थक और प्रभावी उपदेश वह है जो वाणी से नहीं, अपने आचरण से प्रस्तुत किया जाता है।

वाणी और लेखनी के माध्यम से लोगों को किसी बात की, अध्यात्मवाद की भी जानकारी कराई जा सकती है। इससे अधिक भाषणों का कोई उपयोग नहीं। दूसरों को यदि कुछ सिखाना हो, तो उसका एक मात्र तरीका अपना उदाहरण प्रस्तुत करना है। यही ठोस, वास्तविक और प्रभावशाली पद्धति है।
 - शांतिकुंज प्रज्ञा सद्वाक्यपट
 
पढऩे योग्य लिखा जाए, इससे लाख गुना बेहतर है कि लिखने योग्य किया जाए।....अभ्यास की एक बूँद सिद्धांतों, सलाहों और अच्छे संकल्पों के समुद्र से कहीं अच्छी है।
- शांतिकुंज विद्यापीठ सद्वाक्यपट
 
अपने अनन्य आत्मीय प्रज्ञा परिजनों में से प्रत्येक के नाम हमारी यही वसीयत और विरासत है कि हमारे जीवन से कुछ सीखें। कदमों की यथार्थता खोजें, सफलता जाँचें और जिससे जितना बन पड़े अनुकरण का, अनुगमन का प्रयास करें। यह नफे का सौदा है, घाटे का नहीं।
- हमारी वसीयत और विरासत

Message Quotes

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अभी नहीं तो कभी नहीं

हमारी कितनी रातें सिसकते बीती हैं, कितनी बार हम बालकों की तरह बिलख- बिलख कर, फूट- फूट कर रोये हैं। इसे कोई कहाँ जानता है? लोग हमें संत, सिद्ध,...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

जिन चरणों में अपने आप को समर्पित किया, उनके बिना जीवन का एक- एक क्षण पीड़ा के पहाड़ की तरह बीत रहा है ।। जिस दिन...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

अस्सी वर्ष जी गई लम्बी सोद्देश्य शरीर यात्रा पूरी हुई ।। इस अवधि में परमात्मा को हर पल अपने हृदय और अंतःकरण में प्रतिष्ठित मान एक-...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

युगनिर्माण अभियान को युगऋषि ने त्रिवेणी संगम कहा है। इसे तीन धाराएँ मिलकर स्वरूप देती हैं।

ईश्वर- यह योजना ईश्वर की है, इसलिए उसके लिए शक्ति-...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

क्रान्तिधर्मी साहित्य- युग साहित्य महत्ता :

क्रान्तिधर्मी साहित्य- युग साहित्य नाम से विख्यात यह पुस्तकमाला युगद्रष्टा- युगसृजेता प्रज्ञापुरुष पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा १९८९- ९० में महाप्रयाण के...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

महाकाल के तेवर समझें, दण्ड के नहीं- पारितोषिक के पात्र बनें

साहस ने हमें पुकारा है। समय ने, युग ने, कर्तव्य ने, उत्तरदायित्व ने, विवेक ने,...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

विचार क्रांति के बीजों से क्रांति की केसरिया फसल लहलहा उठे-

(जीवट है, तो महाक्रान्ति की चिनगारी को आग और आग को दावानल बनने में सहयोग दें)

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अभी नहीं तो कभी नहीं

गायत्री परिवार/प्रज्ञा परिवार/युग निर्माण परिवार ::
 युग निर्माण योजना को सफल एवं विश्वव्यापी बनाने के लिए पारिवारिक अनुशासन में गठित सृजनशील संगठन, जिसे...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

आत्मीय परिजनों !
समय का प्रवाह वैज्ञानिक प्रगति के साथ प्रत्यक्षवाद का समर्थक होता जा रहा है। सच तो यह है कि जो लोग...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

अपने प्रयोग से आंरभ से ही यह व्रतशील धारण की गई कि परम सत्ता के अनुग्रह से जो मिलेगा; उसे उसी के...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

   [सूक्ष्मीकरण साधना के दौरान नैष्ठिक कार्यकर्त्ताओं के लिए पूज्य गुरुदेव द्वारा लिखा गया एक विशेष निर्देश पत्र]

     यह मनोभाव हमारी तीन उँगलियाँ मिलकर लिख रही हैं। पर किसी को यह नहीं समझना चाहिए कि जो योजना बन रही है और कार्यान्वित हो रही है, उसे प्रस्तुत...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

इस सृष्टि का निर्माण, विकास और विलय परमात्मा के संकल्प से ही होता रहा है ।। परमात्मा के संकल्प से होता रहा है ।। परमात्मा की श्रेष्ठ कृति मनुष्य भी अपने समाज एवं संसार को संकल्पों के आधार पर ही बनाता- बदलता रहता है ।।

श्रीराम शर्मा ने इस महत्त्वपूर्ण...View More