हमारे जीवन से कुछ सीखें

हमारी कितनी रातें सिसकते बीती हैं, कितनी बार हम बालकों की तरह बिलख- बिलख कर, फूट- फूट कर रोये हैं। इसे कोई कहाँ जानता है? लोग हमें संत, सिद्ध, ज्ञानी मानते हैं। कोई लेखक, विद्वान, वक्ता, नेता समझते हैं, पर किसने हमारा अन्तःकरण खोलकर पढ़ा, समझा है? कोई उसे देख सका होता, तो उसे मानवीय व्यथा- वेदना की अनुभूतियों की करुण कराह से हाहाकार करती एक उद्विग्न आत्मा भर इन हड्डियों के ढाँचे में बैठी- बिलखती दिखाई पड़ती।’’

‘‘अपने
अनन्य आत्मीय प्रज्ञा- परिजनों में से प्रत्येक के नाम हमारी यही वसीयत और विरासत है कि हमारे जीवन से कुछ सीखें। कदमों की यथार्थता खोजें, सफलता जाँचें और जिससे जितना बन पड़े अनुकरण का, अनुगमन का प्रयास करें।’’

‘‘प्यार
, प्यार, प्यार यही हमारा मंत्र है। आत्मीयता, ममता, स्नेह और श्रद्धा यही हमारी उपासना आत्मीयता के विस्तार का नाम ही अध्यात्म है।’’

‘‘मेरे
विचारों में- मेरे साहित्य में, मेरी इच्छाओं को ढूँढ़ो। उन शिक्षाओं का अनुसरण करो जो मेरे गुरु ने मुझे दी थीं और जिसे मैंने तुम्हें दिया है। सदैव अपनी दृष्टि लक्ष्य पर स्थिर रखो। अपने मन को मेरे विचारों से परिपूर्ण कर लो। मेरी इच्छा और विचारों के प्रति जागरूकता, स्थिरता और भक्ति में ही शिष्यत्व है।’’ - पं. श्रीराम शर्मा आचार्य

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अभी नहीं तो कभी नहीं

 जर्जर मकान आये दिन गिरते रहते हैं, पर भवन कितने ही विशालकाय हो, यदि आधार स्तम्भ सुदृढ़ हो तो वे भयंकर भूचालों में भी अविचलित खड़े रहते हैं। तूफान हो, झंझावात हों, समुद्र गहरा हो, तो भी कुशल माँझी नाव किनारे पहुँचा देते हैं। युद्ध कितना ही भीषण हो, अनेक...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

जिन चरणों में अपने आप को समर्पित किया, उनके बिना जीवन का एक- एक क्षण पीड़ा के पहाड़ की तरह बीत रहा है ।। जिस दिन...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

अस्सी वर्ष जी गई लम्बी सोद्देश्य शरीर यात्रा पूरी हुई ।। इस अवधि में परमात्मा को हर पल अपने हृदय और अंतःकरण में प्रतिष्ठित मान एक-...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

युगनिर्माण अभियान को युगऋषि ने त्रिवेणी संगम कहा है। इसे तीन धाराएँ मिलकर स्वरूप देती हैं।

ईश्वर- यह योजना ईश्वर की है, इसलिए उसके लिए शक्ति-...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

क्रान्तिधर्मी साहित्य- युग साहित्य महत्ता :

क्रान्तिधर्मी साहित्य- युग साहित्य नाम से विख्यात यह पुस्तकमाला युगद्रष्टा- युगसृजेता प्रज्ञापुरुष पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा १९८९- ९० में महाप्रयाण के...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

महाकाल के तेवर समझें, दण्ड के नहीं- पारितोषिक के पात्र बनें

साहस ने हमें पुकारा है। समय ने, युग ने, कर्तव्य ने, उत्तरदायित्व ने, विवेक ने,...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

विचार क्रांति के बीजों से क्रांति की केसरिया फसल लहलहा उठे-

(जीवट है, तो महाक्रान्ति की चिनगारी को आग और आग को दावानल बनने में सहयोग दें)

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अभी नहीं तो कभी नहीं

गायत्री परिवार/प्रज्ञा परिवार/युग निर्माण परिवार ::
 युग निर्माण योजना को सफल एवं विश्वव्यापी बनाने के लिए पारिवारिक अनुशासन में गठित सृजनशील संगठन, जिसे...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

तुम्हीं को कुम्हार व तुम्हीं को चाक बनना है। हमने तो अनगढ़ सोना ढेरों लाकर रख दिया है, तुम्हीं को साँचा बनाकर सही सिक्के ढालना है।...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

आत्मीय परिजनों !
समय का प्रवाह वैज्ञानिक प्रगति के साथ प्रत्यक्षवाद का समर्थक होता जा रहा है। सच तो यह है कि जो लोग...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

अपने प्रयोग से आंरभ से ही यह व्रतशील धारण की गई कि परम सत्ता के अनुग्रह से जो मिलेगा; उसे उसी के...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

   [सूक्ष्मीकरण साधना के दौरान नैष्ठिक कार्यकर्त्ताओं के लिए पूज्य गुरुदेव द्वारा लिखा गया एक विशेष निर्देश पत्र]

     यह मनोभाव हमारी तीन उँगलियाँ मिलकर लिख रही हैं। पर किसी को यह नहीं समझना चाहिए कि जो योजना बन रही है और कार्यान्वित हो रही है, उसे प्रस्तुत...View More

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अभी नहीं तो कभी नहीं

इस सृष्टि का निर्माण, विकास और विलय परमात्मा के संकल्प से ही होता रहा है ।। परमात्मा के संकल्प से होता रहा है ।। परमात्मा की श्रेष्ठ कृति मनुष्य भी अपने समाज एवं संसार को संकल्पों के आधार पर ही बनाता- बदलता रहता है ।।

श्रीराम शर्मा ने इस महत्त्वपूर्ण...View More