अभी नहीं तो कभी नहीं

 जर्जर मकान आये दिन गिरते रहते हैं, पर भवन कितने ही विशालकाय हो, यदि आधार स्तम्भ सुदृढ़ हो तो वे भयंकर भूचालों में भी अविचलित खड़े रहते हैं। तूफान हो, झंझावात हों, समुद्र गहरा हो, तो भी कुशल माँझी नाव किनारे पहुँचा देते हैं। युद्ध कितना ही भीषण हो, अनेक मोर्चों पर लड़ा जा रहा हो, तो भी साहसी और सूझबूझ वाले सेनापति विजयी होते हैं, यश प्राप्त करते हैं। कुल चौदह किन्तु मूर्धन्य व्यक्तियों से बनी निहत्थी काँग्रेस ने ब्रिटिश हुकूमत से सत्ता छीन ली थी।

अपने शाँति कुँज को इन दिनों एक सौ वैसे ही सुदृढ़ आधार स्तम्भों की, कुशल नाविकों की, साहसी सेनापतियों और मूर्धन्यों की आवश्यकता है। जागृत आत्मायें इस पुकार को सुने-समझे और युग धर्म निर्वाह के लिए आगे आयें। माँ की कोख कलंकित करने वाली कायरता तो न दिखायें।

जिनके मन में राष्ट्रीयहित, सेवा भावना और जातीय स्वाभिमान हो, शिथिल हों किन्तु जिनके पारिवारिक उत्तरदायित्व बहुत बड़े न हों वे शांतिकुंज से पत्र व्यवहार करें, यहीं निवास की बात सोचें। लिप्सायें तो न रावण की पूरी हुई न सिकन्दर की पर औसत भारतीय नागरिक की ब्राह्मणोचित आजीविका में कोई दिक्कत किसी को नहीं आने पायेगी इसे हमारा आश्वासन मानें।

भगवती देवी शर्मा- अखण्ड ज्योति -  अप्रैल 1993

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हमारे जीवन से कुछ सीखें

हमारी कितनी रातें सिसकते बीती हैं, कितनी बार हम बालकों की तरह बिलख- बिलख कर, फूट- फूट कर रोये हैं। इसे कोई कहाँ जानता है? लोग हमें संत, सिद्ध,...View More

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जिन चरणों में अपने आप को समर्पित किया, उनके बिना जीवन का एक- एक क्षण पीड़ा के पहाड़ की तरह बीत रहा है ।। जिस दिन...View More

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अस्सी वर्ष जी गई लम्बी सोद्देश्य शरीर यात्रा पूरी हुई ।। इस अवधि में परमात्मा को हर पल अपने हृदय और अंतःकरण में प्रतिष्ठित मान एक-...View More

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युगनिर्माण अभियान को युगऋषि ने त्रिवेणी संगम कहा है। इसे तीन धाराएँ मिलकर स्वरूप देती हैं।

ईश्वर- यह योजना ईश्वर की है, इसलिए उसके लिए शक्ति-...View More

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क्रान्तिधर्मी साहित्य- युग साहित्य महत्ता :

क्रान्तिधर्मी साहित्य- युग साहित्य नाम से विख्यात यह पुस्तकमाला युगद्रष्टा- युगसृजेता प्रज्ञापुरुष पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा १९८९- ९० में महाप्रयाण के...View More

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महाकाल के तेवर समझें, दण्ड के नहीं- पारितोषिक के पात्र बनें

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विचार क्रांति के बीजों से क्रांति की केसरिया फसल लहलहा उठे-

(जीवट है, तो महाक्रान्ति की चिनगारी को आग और आग को दावानल बनने में सहयोग दें)

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गायत्री परिवार/प्रज्ञा परिवार/युग निर्माण परिवार ::
 युग निर्माण योजना को सफल एवं विश्वव्यापी बनाने के लिए पारिवारिक अनुशासन में गठित सृजनशील संगठन, जिसे...View More

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हमारे जीवन से कुछ सीखें

तुम्हीं को कुम्हार व तुम्हीं को चाक बनना है। हमने तो अनगढ़ सोना ढेरों लाकर रख दिया है, तुम्हीं को साँचा बनाकर सही सिक्के ढालना है।...View More

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आत्मीय परिजनों !
समय का प्रवाह वैज्ञानिक प्रगति के साथ प्रत्यक्षवाद का समर्थक होता जा रहा है। सच तो यह है कि जो लोग...View More

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अपने प्रयोग से आंरभ से ही यह व्रतशील धारण की गई कि परम सत्ता के अनुग्रह से जो मिलेगा; उसे उसी के...View More

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   [सूक्ष्मीकरण साधना के दौरान नैष्ठिक कार्यकर्त्ताओं के लिए पूज्य गुरुदेव द्वारा लिखा गया एक विशेष निर्देश पत्र]

     यह मनोभाव हमारी तीन उँगलियाँ मिलकर लिख रही हैं। पर किसी को यह नहीं समझना चाहिए कि जो योजना बन रही है और कार्यान्वित हो रही है, उसे प्रस्तुत...View More

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इस सृष्टि का निर्माण, विकास और विलय परमात्मा के संकल्प से ही होता रहा है ।। परमात्मा के संकल्प से होता रहा है ।। परमात्मा की श्रेष्ठ कृति मनुष्य भी अपने समाज एवं संसार को संकल्पों के आधार पर ही बनाता- बदलता रहता है ।।

श्रीराम शर्मा ने इस महत्त्वपूर्ण...View More