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Dhirendra Nath Misra
2016-02-23 01:16:54
वेब लिंक पर उपलब्ध सद वाक्यों को अब तक 20,96,980 आत्मीय बंधुओं द्वारा देखा और पढ़ा गया है यदि इन बंधुओं के घर मे कवल माता ,पिता ही होंगे तब भी संदेश 3 X 20,96,980 =62,90,940 लोगों तक पहुँच गया तथा 24 करोड़ लोगों तक संदेश पहुँच गया तो एक हवन पूजन करने जैसा कार्य समझा जायेगा और आशा करता हूँ कि ईश्वरेक्षा से यह कार्य शीघ्र पूरा हो जायेगा । जीवन मे ऐसे 1008 हवन हो जायेंगे तो 1008 गायत्री मंत्र जपने जैसा कार्य समझा जायेगा तथा इस प्रकार 24192 करोड़ लोगों तक यह संदेश ईश्वरेक्षा से शीघ्र पहुँच जायेगा ...........आशा करता हूँ आप सभी का आशीष मिलता रहेगा
pritish
2016-01-20 14:24:32
Dhirendra Nath Misra
2015-07-21 18:59:19
मंत्र दिव्यास्त्र हैं और कोई मंत्र कीलित नहीं है । मंत्र कारतूस की तरह ही चलते हैं - मंत्र तरकस मे रखे तीर जैसे भी हैं और आप जब चाहें अपनी धनुष पर संधान कर चला सकते हैं । जैसे जिस क्षमता की आपकी धनुष होगी वैसे ही तीर का संधान उस धनुष पर होगा और उसका दायरा भी उसी के अनुरूप होगा । मंत्रों के बारे मे महादेवेन कीलितम जो लिखा है उसका अर्थ है आपके अन्दर योग्यता ,पात्रता और पवित्रता है तो मंत्र का प्रयोग आप कर सकते हैं अन्यथा नहीं ।आप ऋषियों जैसे जीवन यापन करते हैं तो आप से मंत्र चलेंगे और उनका प्रयोग आप कर सकेंगे अन्यथा हरगिज़ नहीं । समाज और देश को नियमानुसार चलाने के लिये प्रत्येक देश का अलग अलग कानून है , जो संहिता बद्ध हैं और उनको प्रयोग करने का अधिकार किस प्रकार किस सीमा तक किसको किसको प्राप्त है यह आपको विदित है । सूरज चाँद सितारो पर जाने से संबन्धित ज्ञान अनादि काल से समय के ऋषियों या वैज्ञानिकों ने बताया है और उसको लोगों ने देखा और समझा है और पात्र अधिकारी व्यक्ति उन तक संपर्क भी किये हैं । किसी भी क्षेत्र मे विषय विशेष से संबन्धित योग्यता , प्रतिभा ,क्षमता ,पात्रता ,आवश्यकता और अभीप्सा होने पर ही सफलता मिलने की उम्मीद हो सकती है और चूंकि मंत्र दिव्यास्त्र हैं इसलिये उनको चलाने और प्रयोग करने मे किसी भी प्रकार की धूर्तता से ना कभी सफलता मिली थी और ना ही भविष्य मे कभी मिलेगी ।
Dhirendra Nath Misra
2015-07-18 21:04:36
He, who takes responsibility and burden of hated,virtue less,selfish,miser,fraud and lay person by any reason,obviously becomes jealous of him though he is never at fault and thus worthy less enjoys and worthiness suffers.This happens to worthiness due to astrological reason wherein 5th house in natal chart of sufferer is found afflicted and sufferer does not get any support from his assistants or followers and he himself has to take the responsibility and burden of worthy less associates/assistants/followers etc.Failure,backwardness or suffering is the root cause of jealousy though sermon against jealousy or relating to it is often liked by most of the people without any sound reasoning.
Dhirendra Nath Misra
2015-07-18 21:00:05
He, who takes responsibility and burden of hated,virtue less,selfish,miser,fraud and lay person by any reason,obviously becomes jealous of him though he is never at fault and thus worthy less enjoys and worthiness suffers.This happens to worthiness due to astrological reason wherein 5th house in natal chart of sufferer is found afflicted and sufferer does not get any support from his assistants or followers and he himself has to take the responsibility and burden of worthy less associates/assistants/followers etc.Failure,backwardness or suffering is the root cause of jealous though sermon against jealousy or relating to it is often liked by most of the people without any sound reasoning.
Dhirendra Nath Misra
2015-07-16 21:16:08
विद्यार्थियों के लिये परीक्षा मे अच्छे परिणाम हेतु नित्य नियम पूर्वक जप करने के लिये राम चरित मानष मे दिया गया सिद्ध मंत्र जो दुर्भाग्य दूर कर 75 % से 100 % के मध्य शुभ परिणाम प्राप्त करा सकता है - नित्य पालन करने हेतु एवं साप्ताहिक नियम -धर्म : [1] विद्यार्थी नित्य प्रातः ब्रह्म वेला मे शौच , योगासन ,क्रिया योग आदि से निवृत्त होकर कुछ देर बाद सामान्य शुद्ध जल मे कुछ बूँद गंगा जल डाल कर स्नान करें [2] गुरु वन्दना और सामान्य देव पूजन आदि करके विद्यार्थी निम्न मंत्र का भाव पूर्वक जप करें और उसी अनुरूप अपने को ढालने बनाने का पूर्ण प्रयाश करें नित्य जप हेतु मंत्र - मोरि सुधारहु सो सब भाती , जासु कृपा नहिं कृपा अघाती [3]विद्यार्थी विद्या राज गोपाल मंत्र का रविवार को जप कर गौ घृत से प्रातः 8 बजे से पूर्व हवन करें और जिसके पास हवन करने की व्यवस्था नहीं है वह घृत दीप दान एवं प्रज्ज्वलन करें . मंत्र सुने और जप - हवन करें the mantra is AUM glaum kLeem namo bhagavate nandaputraaya baalavapuShe shyaamaLaaya gopeejanavallabhaaya svaaH. Ask the boy to recite this as much as he can every day in the morning. He may also offer milk, butter etc to Shree krishna deity in any temple near by (need not be every day). it effects are stated thus : yantraraaja idam vidyaaraajagopaalanaamakaH shariirastho mahaabudhi vidyaagjaanavivardhanaH muukaM karoti vaachaalaM brihaspatisamaM naraM bhuuShaNaM dhanadhaanyaadi tatra vridhimavaapnuyaal. This is the mantra used in the Yantra of Vidhya rajagopala. There are also other mantras used while creating the Yantra. I have only given the most important and core mantra for recitation.
Dhirendra Nath Misra
2015-07-16 21:10:53
Dhirendra Nath Misra
2015-07-09 21:08:17
Importance of problems & fear in life: It is not affection rather it is fear that makes you believe that you should live together and if you don’t have problems in your life, you will not feel to live together. Even a hungry baby needs his mother only for milk feeding
Dhirendra Nath Misra
2015-07-09 20:59:42
What do ASTROLOGERS of present time know ? आज के ज्योतिषी दैवज्ञ नहीं हैं जो समष्या का समाधान जानते हैं बल्कि मात्र उस पेथ्होलाजिस्ट के समान हो सकते जो जाँच रिपोर्ट से शरीर मे हो रही परेशानी का कारण का अनुमान लगाते हैं और वह भी तब जब कि एक चिकित्सक राय देता है कि क्या जाँच रिपोर्ट तैयार करना है । वर्तमान रोग की दवा ,जाँच रिपोर्ट तैयार करने वाला पेथ्होलाजिस्ट नहीं बताता है । यह रोग की दवा बताने का कार्य चिकित्सक का है । ठीक इसी तरह क्यों कि ज्योतिषी दैवज्ञ नहीं हैं इसी लिए समष्या का समाधान बताने का कार्य ज्योतिषी जी लोगों का नहीं है बल्कि यह कार्य सिद्ध संत मांत्रिक का है जो सौभाग्य से किसी किसी को मिल जाते हैं । आज कल तो स्कूल मे अध्यापक ठीक से पढ़ाते ही नहीं इसी लिए मजबूरन बच्चे ट्यूशन के लिये उनके पीछे भागते हैं अन्यथा प्रयोगात्मक और गृह परीक्षा मे बच्चे को फेल होना ही है तथा ऐसे माहौल मे रोग की दवा बताने वाले दैवज्ञ सिद्ध संत और गुरु कहाँ मिलने वाले हैं । इसलिये आज कल योग्य ज्योतिषी ,अपने कर्म और पुरुषार्थ का ही भरोसा करना चाहिये ।
Dhirendra Nath Misra
2015-07-09 20:55:51
Why do we face much problems in our daily life though we get sufficient amount of money for our bread & butter ? Is it bad effect of our daily worshiping when we invoke blessings of MA for salvation at the earliest ? Are we on the way to get Salvation and our "Karam Phal account" clearance are being prepared ? Should we stop our daily worshiping to make our life very comfortable ?

2015-07-09 20:46:14
Guruvar Ved Murti Taponishtha Pandit Sri Ram Sharma Acharya Ji has taught that he who always speaks truth,can make successful predictions which will never fail.
Dhirendra Nath Misra
2015-07-09 20:36:24
Spiritual practices Keep yourself away from clutches of birth,re-birth,fate & illusion -ज्योतिष और भाग्य के बन्धन से जीवन मुक्त पुरुष परे हो जाता है!!! बन्धन मुक्ति के मार्ग पर अग्रसर होने ,ईश्वर आराधना मे जुडने,पाप शमन करने की निरन्तर साधना करने ,प्रायश्चित करने की निरन्तर साधना करने ..... पर जीवन मुक्त पुरुष ज्योतिष और भाग्य के बन्धन से परे हो जाता है - परम सिद्ध गौतम बुद्ध का यही सन्देश है
Dhirendra Nath Misra
2015-07-09 20:29:48
What is destiny? एक पत्थर का बोल्डर प्रयत्न से उचाई के रास्ते पर धकेला जा सकेगा और नीचे की तरफ अपने आप जड़ता के नियम से चला आयेगा । इसी तरह भाग्य प्रयत्न से बनता है और प्रयत्न से हेर फेर करके कुछ रोक बना सकते हो तो कुछ बना लो, रोक छेक कर लो अन्यथा दुर्भाग्य, मृत्यु , बड़े दण्ड ,परेशानियाँ स्वयं अपना नीचे की तरफ ढुलक रहे बोल्डर की तरह रास्ता बना लेंगी ।
Dhirendra Nath Misra
2015-07-09 20:23:53
आप अपने द्वारा किये गये जुर्म के बदले मे सज़ा काटना चाहते हैं या जज के आदेशानुसार अर्थ दण्ड जमा करना चाहते हैं / कर्जा अदा करना चाहते हैं. ..... सभी सज़ाओं के बदले अर्थ दण्ड जमा कर आप सज़ा से मुक्त नहीं हो सकते हैं - Always enjoy debt free life for progress and as early as possible ,increase your regular premium of instalment to pay off your loan ......Your low status is the mark of this undisputed fact that you still have to pay off your loan amount आनन्द से भरे जीवन के लिये कर्जे को यथा शीघ्र अदा करिये ..... आपका निम्न स्तर बिना किसी संदेह के यह बताता है कि आप के ऊपर कर्जा लदा हुआ है -पितृ ऋण ,मातृ ऋण ,समाज ऋण ,गुरु ऋण ,बैंक ऋण एवं बहुत से ऋण होते है तथा पाप कर्मो का फल जब तक आप भोग नहीं लेंगे तब तक वह भी लिये गये ऋण की तरह आप पर लदा रहेगा -आप इस जन्म मे एवं अगले जन्मों मे भी उसे भरेंगे या उसके एवज़ मे सज़ा काटेंगे ।कोई भी हो ,मनमानी करने के लिये स्वतन्त्र नहीं हैं -पुराना कर्जा -कर्म दण्ड शेष नहीं होने पर आपको अपने अच्छे या बुरे कर्म के अनुसार कर्म का फल अवश्य मिलेगा
Dhirendra Nath Misra
2015-07-09 20:21:58
अपने पद के कार्य के अनुरूप किये गये नित्य कर्म और अपने द्वारा किये गये पुण्य कर्म के अर्थ को समझिये । पुण्य कर्म करने से ही भाग्य का निर्माण होता जो परीक्षा के समय , बुरे समय मे और अगले जन्म मे भी सहायक होता है ।
Dhirendra Nath Misra
2015-07-09 20:19:01
मनुष्य केवल सदकर्म कर सकता है और फल की प्राप्ति उसके तात्कालिक कर्म फल के अधीन नहीं है - भगवान कृष्ण जैसे समर्थ मित्र ने अपने सखा को कहा जाता है कि 18 दिन तक लगातार दिव्य प्रवचन देकर कर्म और भवितव्यता का बोध कराया था और यह बोध कराया था कि आज जो कर्म हम कर रहे हैं उसका फल और प्रतिफल जीव द्वारा कई जन्मो मे किये गये कर्मों का लेखा जोखा होता है ...... इसी लिये एक ही समय , तारीख,माह ,सन और स्थान पर किसी भी विधि से जन्मे लोगों को उनके द्वारा किये गये एक समान कर्म करने पर भी एक समान कर्म फल अर्थात आनन्द या दुख की प्राप्ति नहीं होती .और भिन्न भिन्न परिणाम प्राप्त होते हैं
Dhirendra Nath Misra
2015-07-08 08:09:59
ऋषियों द्वारा लिखे गये सद वाक्य जीवन मे आशा एवं स्फूर्ति का संचार कर मानसिक संतुलन व्यवस्थित बनाये रखने मे बहुत योगदान प्रदान करते हैं
Dhirendra Nath Misra
2015-07-07 18:10:03
This is the best way of teaching and most of the sages only put themselves and their whole life as a model and keep mum