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समाज निर्माण


इक्कीसवीं सदी का गंगावतरण - (क्रान्तिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला -22)

अत्यन्त व्यस्त, असमर्थ लोगों के लिए एक प्रतीक साधना भी युग- सन्धि पुरश्चरण के अन्तर्गत नियोजन की गई...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
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समाज निर्माण


शुद्ध व्यवहार और सदाचार समाज की सुदृढ़ स्थिति के दो आधार स्तम्भ हैं। इनसे व्यक्ति का भाग्य और समाज का भविष्य विकसित होता है। शिक्षा, धन एवं भौतिक समुन्नति का सुख...View More
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समाज निर्माण


नारियाँ गुण- सौन्दर्य बढ़ायें, आभूषण नहीं। आभूषणों से सौन्दर्य बढ़ता हो सम्मान मिलता हो ,ऐसी कोई बात तो समझ में आती नहीं, उलटे शरीर के अंग दुखते है। चोरों का...View More
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समाज निर्माण


सहृदयता मानवीय गरिमा का मेरुदण्ड है।जिसका सम्बल पाकर ही व्यक्ति एवं समाज ऊंचे उठते, मानवी गुणों से भरे-पुरे बनते हैं। इसका अभाव निष्ठुरता, कठोरता, असहिष्णुता जैसी प्रवृत्तियों के रूप में प्रकट होता है।मानवी गरिमा के टुटते हुए इस मेरुदण्ड को हर कीमत पर बचाया जाना चाहिये। 

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Pandit Shriram Sharma Acharya
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समाज निर्माण


सेवा वृत्ति हमारे स्वभाव का एक अंग होना चाहिए। इस एक मानवीय कर्तृत्व को पुण्य- परमार्थ की दृष्टि से ही किया जाना चाहिए। यदि इसके बदले यश की, प्रत्युपकार की...View More
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समाज निर्माण


गीता एक ऐसे समाज की कल्पना करती है, जिसमें प्रत्येक मानव को स्वतंत्रता और समानता का अधिकार है। मनुष्य और मनुष्य के बीच धर्म, जाति, वर्ण, लिंग और धन की दीवारें नहीं हैं।...View More
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