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शांतिकुंज -21 वीं सदी की गंगोत्री


गंगा गोमुख से निकलती है और यमुना यमुनोत्री से, नर्मदा का अवतरण अमरकण्टक के एक छोटे से कुण्ड से होता है।मान सरोवर से ब्रह्मपुत्र निकलती है।शान्तिकुंज ऐसे अनेकों प्रवाहों को प्रवाहित कर रहा है, जिसका प्रभाव न केवल भारत को वरन् समूचे विश्व को एक नई दिशा में घसीटता हुआ ले जाएगा।

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Pandit Shriram Sharma Acharya
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शांतिकुंज -21 वीं सदी की गंगोत्री


आज मनुष्य को जीना कहाँ आता है? जीना भी एक कला है। सब आदमी खाते हैं, पीते हैं, सोते हैं और मौत के मुँह में चले जाते हैं, किन्तु जीना नहीं जानते। जीना बड़ी शानदार चीज है। इसको संजीवनी विद्या कहते हैं- जीवन जीने की कला। यहाँ हम अपने विश्वविद्यालय में, शांतिकुंज में जीवन जीने की कला सिखाते हैं और...View More
Pandit Shriram Sharma Acharya
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शांतिकुंज -21 वीं सदी की गंगोत्री


‘अखण्ड ज्योति’ निर्माण का मिशन लेकर अग्रसर होती है। अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य को इस ओर ध्यान देना होगा। हम अपने मनों को स्वच्छ करें, अपनी मलीनता को बुहारें...View More
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शांतिकुंज -21 वीं सदी की गंगोत्री


पूज्यवर ने एक आदर्श आचार संहिता के नाते प्रत्येक परिजन से (शांतिकुंज में) प्रवेश के समय एक ही बात कही थी कि- ‘‘तुम सब यह मानकर चलना कि यह तुम्हारी...View More
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